वाराणसी। पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन की ओर से त्रिस्तरीय पंचायतों के आगामी चुनाव में देरी होने पर वर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बनाए जाने की मांग प्रधान संघ के द्वारा उठाया गया है। राष्ट्रीय ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने वाराणसी चौबेपुर क्षेत्र में आयोजित ग्राम प्रधानों की बैठक में उक्त विचार व्यक्त किए। 

उन्होंने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के छ माह पहले ही निर्वाचन विभाग चुनाव की प्रक्रिया तेज कर देता है, लेकिन वर्तमान समय में यह नहीं हो रहा है। यदि किसी कारण से चुनाव समय पर नहीं हो पाता है तो ऐसे में लोकतांत्रिक व्यवस्था के अन्तर्गत राजस्थान, हरियाणा और उत्तराखंड के तर्ज पर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया जाना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि कोविड काल के दौरान ग्राम प्रधानों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया था इसके लिए प्रधान संगठन को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी थी। उस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंचायती राज चुनाव अधिनियम की धारा 3-ए को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार को शपथपत्र देकर छह माह के भीतर चुनाव संपन्न कराना पड़ा था।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस बार लोकतांत्रिक व्यवस्था में ग्राम प्रधानों के साथ अन्याय हुआ और उन्हें प्रशासक नहीं बनाया गया तो प्रधान संगठन सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मुकदमा दायर करेगा और आंदोलन शुरू करने को भी बाध्य होगा। इस मुद्दे को लेकर संगठन के लोग जनपदवार प्रधानो की बैठक कर आगे की रणनीति तैयार करने में लगे हुए हैं ताकि पंचायत व्यवस्था और ग्राम पंचायतों के अधिकारों को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।

इस दौरान बैठक में ब्लॉक अध्यक्ष लाल बहादुर पटेल, उदय प्रताप सिंह, शकील अहमद, मुकेश पटेल आराजी लाइन ब्लॉक अध्यक्ष, मनीष जायसवाल, अनिल मोदनवाल, दालसिंगार राजभर, मिथिलेश कुमार, राधेश्याम गुप्ता, मंगरु राजभर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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