Khabarilaal news desk
वाराणसी। किसानों को टिकाऊ खेती और संतुलित पोषण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ICAR-IIVR द्वारा राष्ट्रीय उर्वरक जागरूकता अभियान के अंतर्गत सेवापुरी के(आराजीलाइन) ब्लॉक के ग्राम पनियारा एवं धानापुर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक विकल्पों के महत्व तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के वैज्ञानिक उपायों से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि अरविन्द कुमार पाण्डेय और लल्लन दुबे समेत बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
हरी खाद जैसे सनई और ढैंचा की बुआई को अपनाने की सलाह
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. टी. चौबे ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने हरी खाद जैसे सनई और ढैंचा की बुआई को अपनाने की सलाह दी, जिससे मृदा में पोषक तत्वों की प्राकृतिक वृद्धि होती है।
जैविक उर्वरक से बढ़ेगी पैदावार
डॉ. केशव गौतम ने ट्राइकोडर्मा सहित सूक्ष्मजीव आधारित जैव उर्वरकों के उपयोग को प्रभावी बताते हुए कहा कि ये फसलों को रोगों से बचाने के साथ उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं।
रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता मृदा स्वास्थ्य के लिए हो सकती है हानिकारक
समन्वित पोषण प्रबंधन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. श्रेया पंवार ने कहा कि केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता मृदा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। उन्होंने रासायनिक और जैविक उर्वरकों के संतुलित उपयोग की आवश्यकता बताई।
कृषि में महिलाओं की अहम भूमिका
डॉ. एस. भुवनेश्वरी ने कृषि कार्यों में महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए जैव रसायनों के प्रबंधन में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
किसान -वैज्ञानिक संवाद के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन किसान-वैज्ञानिक संवाद के साथ हुआ, जिसमें किसानों की समस्याओं का समाधान किया गया और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया। किसानों ने इस पहल को उपयोगी बताते हुए संस्थान के प्रति आभार जताया।यह अभियान किसानों के लिए आधुनिक, वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ेगा बल्कि मृदा स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

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