Khabrilaal News Desk :
वाराणसी के श्री अग्रसेन कन्या पीजी कॉलेज, परमानन्दपुर में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग द्वारा एक वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इतिहास, संस्कृति और भारतीय स्वाभिमान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय अस्तित्व और स्वाभिमान के हजार वर्षों के संघर्ष का प्रतीक
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो. मिथिलेश सिंह ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारतीय अस्तित्व और स्वाभिमान के हजार वर्षों के संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में गुजरात के सोमनाथ में इस पर्व का भव्य आयोजन किया गया था।
सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख स्थल
विभागाध्यक्ष प्रो. दुष्यंत सिंह ने सोमनाथ मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख स्थल है। उन्होंने कहा कि 1026 में महमूद गजनबी द्वारा मंदिर को नष्ट किए जाने के बाद भी इसका पुनर्निर्माण हुआ, जो भारतीय आस्था और संकल्प का प्रतीक है।
सोमनाथ मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सरला सिंह ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है और अनेक आक्रमणों के बावजूद यह अपनी पहचान बनाए रखने में सफल रहा है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्रा रहीं मौजूद
संगोष्ठी में प्रो. मृदुला व्यास, दिव्या पाल, डॉ. सुमन सिंह, डॉ. मेनका सिंह, डॉ. अंजली त्यागी सहित कई प्रवक्ताओं ने विचार रखे। कार्यक्रम में सैकड़ों छात्राओं की उपस्थिति रही।

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