Khabrilaal News Desk : 

वाराणसी |बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने मानवता को शांति, करुणा और आत्मप्रकाश के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल भगवान बुद्ध की जयंती नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की शाश्वत प्रकाश धारा का उत्सव है।

बुद्ध दर्शन को बताया विश्व के लिए मार्गदर्शक

कुलपति ने कहा कि गौतम बुद्ध का व्यक्तित्व मानवता के लिए एक शीतल चंद्रमा की तरह है, जिसकी करुणामयी आभा आज भी विश्व को दिशा दे रही है। उन्होंने कहा कि बुद्ध का ‘धम्म’ जीवन के दुखों का सरल और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करता है।

अशांत विश्व में शांति का संदेश,

 प्रो. शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में जब विश्व संघर्ष और असहिष्णुता से जूझ रहा है, तब बुद्ध का “अप्प दीपो भव” का संदेश आत्मप्रकाश और वैश्विक शांति की राह दिखाता है।

अष्टांगिक मार्ग को बताया जीवन का आधार

उन्होंने बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग को जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने का संपूर्ण सूत्र बताया। इसमें सम्यक दृष्टि, संकल्प, वाणी, कर्म, आजीविका, प्रयास, स्मृति और समाधि को जीवन में अपनाने पर बल दिया गया।

करुणा और सहअस्तित्व का दिया संदेश

 कुलपति ने कहा कि बुद्ध का संदेश केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जीवन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी से इस पर्व को केवल अनुष्ठान न मानकर इसके मूल संदेश को जीवन में उतारने का आह्वान किया।

आंतरिक विकास को बताया वास्तविक प्रगति

 उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आंतरिक शुद्धि और आत्मविकास में निहित है। यही भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल संदेश है।

 

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