Khabarilaal News Desk :
हवाई यात्रा के दौरान अतिरिक्त बैगेज शुल्क और एयरलाइंस की सेवाओं को लेकर यात्रियों की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। लेकिन राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग के एक हालिया फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई एयरलाइन अपनी घोषित योजना का लाभ देने से इनकार करती है और गलती स्वीकार करने के बाद भी रिफंड नहीं करती, तो उसे उपभोक्ता को भारी मुआवजा देना पड़ सकता है।
क्या था पूरा मामला?
मामला जयपुर की एक छात्रा से जुड़ा है, जो यूनाइटेड किंगडम में पढ़ाई कर रही थीं। जुलाई 2021 में लंदन से भारत लौटते समय उनके पास निर्धारित सीमा से अधिक सामान था। छात्रा ने एयर इंडिया की “महाराजा स्कॉलर स्कीम” के तहत अतिरिक्त बैगेज शुल्क में छूट की मांग की।
लेकिन एयर इंडिया के कर्मचारियों ने उन्हें इस योजना के लिए पात्र नहीं माना और उनसे 350 ब्रिटिश पाउंड (लगभग ₹34,131) अतिरिक्त बैगेज शुल्क के रूप में वसूल लिए।
एयर इंडिया ने गलती मानी, फिर भी नहीं किया रिफंड
छात्रा द्वारा लगातार ई-मेल और पत्राचार किए जाने के बाद एयर इंडिया ने स्वयं स्वीकार किया कि वह वास्तव में स्कॉलर स्कीम का लाभ पाने की पात्र थीं।
एयरलाइन ने सितंबर 2021 में रिफंड प्रक्रिया शुरू करने की बात कही और बैंक एवं कार्ड संबंधी जानकारी भी मांगी, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
जब लंबे समय तक कोई समाधान नहीं निकला तो छात्रा ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
जिला उपभोक्ता आयोग का फैसला
फरवरी 2024 में जिला उपभोक्ता आयोग ने छात्रा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश दिया कि—
- ₹34,131 अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस की जाए
- ₹4,000 मानसिक पीड़ा के लिए दिए जाएं
- ₹3,000 मुकदमेबाजी खर्च के रूप में दिए जाएं
हालांकि छात्रा ने इस मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की।
राज्य आयोग ने बढ़ाया मुआवजा
राज्य उपभोक्ता आयोग ने मामले के रिकॉर्ड और साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए पाया कि एयर इंडिया ने छात्रा की पात्रता स्वीकार कर ली थी, फिर भी समय पर रिफंड नहीं किया गया।
आयोग ने इसे “Deficiency in Service” (सेवा में कमी) का स्पष्ट मामला माना।
इसके बाद आयोग ने—
- मानसिक पीड़ा का मुआवजा ₹4,000 से बढ़ाकर ₹30,000 किया
- मुकदमेबाजी खर्च ₹3,000 से बढ़ाकर ₹10,000 किया
- मूल रिफंड राशि ₹34,131 बरकरार रखी
इस तरह छात्रा को कुल ₹74,131 का भुगतान करने का आदेश दिया गया।
उपभोक्ता कानून क्या कहता है?
उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई ही नहीं, बल्कि—
- मानसिक कष्ट
- असुविधा
- अनावश्यक उत्पीड़न
- समय की बर्बादी
के लिए भी मुआवजा दिया जा सकता है।
फैसले का कानूनी महत्व
उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट संदेश दिया कि कंपनियां अपनी घोषित योजनाओं, ऑफर्स और वादों से पीछे नहीं हट सकतीं। यदि कोई सेवा प्रदाता अपनी गलती स्वीकार करने के बाद भी उपभोक्ता को राहत नहीं देता, तो उसे केवल मूल राशि ही नहीं बल्कि मानसिक क्षति और मुकदमेबाजी का खर्च भी चुकाना पड़ सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य के उपभोक्ता विवादों में एक महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है और यात्रियों सहित सभी उपभोक्ताओं के अधिकारों को मजबूत करता है।
Comments (0)