Khabarilaal News Desk
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) पहुंचे, जहां उन्होंने विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विज्ञान, कृषि, नवाचार और एमएसएमई क्षेत्र की भूमिका पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि विज्ञान का वास्तविक उद्देश्य लोक कल्याण है और दुनिया में जिन देशों ने प्रगति की है, उनके विकास का आधार विज्ञान और नवाचार रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत कृषि और एमएसएमई क्षेत्र है। उन्होंने किसानों, कारीगरों और व्यापारियों की भूमिका को देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना की मजबूत कड़ी बताया।
विज्ञान और नवाचार से ही होगा भारत का विकास
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की प्राचीन परंपरा ज्ञान, विज्ञान और नवाचार पर आधारित रही है। उन्होंने कहा कि एक समय वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक थी, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदल गईं।
उन्होंने कहा कि पहले किसान केवल खेती नहीं करता था, बल्कि वह स्वयं नवाचार करता था। कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं थी, क्योंकि किसान अपनी आवश्यकताओं और तकनीकों के अनुसार खेती को विकसित करता था।
एमएसएमई और कृषि क्षेत्र को बताया विकास की रीढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहन देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसका परिणाम है कि आज प्रदेश में लगभग 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में तीन करोड़ से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि "एक जिला एक उत्पाद" योजना के माध्यम से कारीगरों को बाजार, डिजाइन और पैकेजिंग की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, जिससे प्रदेश का निर्यात दो लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।
ऑर्गेनिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर
सीएम योगी ने किसानों से ऑर्गेनिक और जीरो बजट खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अनावश्यक उपयोग खेतों की उर्वरता को नुकसान पहुंचा सकता है।
मुख्यमंत्री ने मां गंगा के प्रति भारतीय समाज की आस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है।
विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन का हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इस अवसर पर विज्ञान भारती की पुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. शेखर पांडेय ने संगठन की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि विज्ञान भारती की स्थापना वर्ष 1991 में विज्ञान की उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने के उद्देश्य से की गई थी।
BHU में बन रहे नेशनल एजिंग सेंटर का किया निरीक्षण
कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने BHU के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में निर्माणाधीन "नेशनल सेंटर फॉर एजिंग" का स्थलीय निरीक्षण किया। लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह अत्याधुनिक सात मंजिला केंद्र 200 बिस्तरों की सुविधा से लैस होगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा कराने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह केंद्र बुजुर्गों की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा।
बुजुर्गों को मिलेंगी अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं
नेशनल सेंटर फॉर एजिंग देश का तीसरा और उत्तर भारत का प्रमुख जरा चिकित्सा केंद्र होगा। यहां मल्टी-स्पेशियलिटी जेरिएट्रिक ओपीडी, मेमोरी क्लिनिक, गठिया क्लिनिक, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू, डे-केयर और पुनर्वास सेवाओं की सुविधा उपलब्ध होगी।
इसके साथ ही डॉक्टरों और नर्सों के प्रशिक्षण, जरा चिकित्सा अनुसंधान और बुजुर्गों के लिए विशेष उपचार पद्धतियों के विकास पर भी कार्य किया जाएगा।
वाराणसी को मिलेगी स्वास्थ्य और अनुसंधान की नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि नेशनल सेंटर फॉर एजिंग के शुरू होने से पूर्वांचल सहित पूरे उत्तर भारत के बुजुर्गों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वहीं विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अधिवेशन से विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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