Khabarilaal News Desk :
वाराणसी। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और घटती हरियाली के बीच वाराणसी को हरित और प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में नगर निगम ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने और शहर को एक बड़े "ऑक्सीजन हब" के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से सारंगनाथ चौराहा स्थित सारंगतालाब क्षेत्र में तीसरे मियावाकी वन (अर्बन फॉरेस्ट) की शुरुआत की गई है। इस परियोजना के तहत 40 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।
डोमरी और कंचनपुर में मियावाकी वन की सफलता के बाद अब सारंगतालाब को भी घने शहरी जंगल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे शहर की आबोहवा को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
प्रभारी मंत्री और महापौर ने किया अभियान का शुभारंभ
शनिवार को प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जनपद के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना, महापौर अशोक कुमार तिवारी, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य और कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से पौधारोपण कर अभियान का शुभारंभ किया।
अभियान के पहले दिन पीपल, पाकड़, बरगद, जामुन, अमलताश, गुलमोहर और मौलश्री सहित 20 विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए। कार्यक्रम में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार, नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।
काशी को बनाया जा रहा हरित और स्वच्छ शहर
नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे "ग्रीन काशी" अभियान के तहत शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सड़कों के चौड़ीकरण, निर्माण कार्यों और लगातार घटते वृक्ष आवरण के कारण पर्यावरण पर पड़ रहे प्रभाव को कम करने के लिए मियावाकी तकनीक को अपनाया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मियावाकी पद्धति से लगाए गए पौधे सामान्य पौधारोपण की तुलना में कई गुना तेजी से विकसित होते हैं और कम समय में घना जंगल तैयार कर देते हैं।
डोमरी के विश्व रिकॉर्ड के बाद एक और बड़ा कदम
इससे पहले नगर निगम ने डोमरी (सुजाबाद) क्षेत्र में करीब 350 बीघा भूमि पर मात्र एक घंटे में 2,51,446 पौधे रोपकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया था। इसके बाद कंचनपुर में भी मियावाकी वन विकसित किया गया, जिसे सकारात्मक परिणाम मिले हैं।
अब सारंगतालाब को शहर का तीसरा प्रमुख मियावाकी वन बनाया जा रहा है, जिससे वाराणसी में हरित क्षेत्र का विस्तार होगा और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी।
प्रदूषण नियंत्रण और शुद्ध हवा उपलब्ध कराने में मिलेगी मदद
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि मियावाकी तकनीक से विकसित होने वाले वन शहर के प्रदूषण स्तर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। घने वृक्षारोपण से कार्बन अवशोषण बढ़ेगा, तापमान नियंत्रित होगा और नागरिकों को स्वच्छ एवं शुद्ध हवा उपलब्ध होगी।
नगर निगम का लक्ष्य आने वाले वर्षों में वाराणसी को पर्यावरणीय दृष्टि से अधिक सुरक्षित और हरित शहर के रूप में स्थापित करना है।
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