Khabarilaal News Desk
वॉशिंगटन। ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) को कब्जे में लेने के लिए अमेरिकी सेना ने एक गुप्त सैन्य अभियान की विस्तृत योजना तैयार की थी, लेकिन बड़े पैमाने पर सैनिकों के हताहत होने और क्षेत्रीय युद्ध भड़कने के खतरे को देखते हुए तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। यह दावा अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में किया गया है।
गुप्त सैन्य ब्रीफिंग में हुआ था खुलासा
रिपोर्ट के अनुसार मई के अंतिम सप्ताह में अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारियों ने फ्लोरिडा स्थित यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) मुख्यालय में ईरान से संवर्धित यूरेनियम जब्त करने की संभावित रणनीति पर चर्चा की थी।
बताया गया कि इस ब्रीफिंग की गंभीरता को देखते हुए जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन को नाटो की एक महत्वपूर्ण बैठक बीच में छोड़कर लौटना पड़ा था।
ट्रंप ने क्यों रोका ऑपरेशन?
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रंप को बताया था कि यदि अमेरिकी सेना ईरान में जमीनी अभियान चलाती है तो ईरान की ओर से कड़ा सैन्य जवाब मिल सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप की मुख्य चिंताएं थीं—
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बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने की आशंका
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युद्ध के लंबे समय तक खिंचने का खतरा
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मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष की संभावना
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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव
इन जोखिमों को देखते हुए ट्रंप ने ऑपरेशन को आगे बढ़ाने से मना कर दिया।
सुरंगों में छिपा है ईरान का यूरेनियम
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम को अत्यधिक सुरक्षित भूमिगत ठिकानों और सुरंगों में रखा हुआ है। अमेरिकी सेना को आशंका थी कि इन सुरंगों में विस्फोटक जाल (Booby Traps) लगाए जा सकते हैं।
ऐसे में यूरेनियम तक पहुंचना और उसे सुरक्षित बाहर निकालना बेहद जोखिम भरा मिशन साबित हो सकता था।
सैकड़ों स्पेशल फोर्स की पड़ती जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के ऑपरेशन के लिए अमेरिका को सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशन सैनिकों के साथ बड़ी सैन्य टुकड़ी तैनात करनी पड़ती।
सैन्य अधिकारियों के आकलन के अनुसार मिशन का जोखिम स्तर "हाई से एक्सट्रीम" श्रेणी में था, यानी सफलता मिलने की स्थिति में भी अमेरिकी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था।
अमेरिका के लिए क्यों अहम है यूरेनियम?
ईरान का संवर्धित यूरेनियम लंबे समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता का विषय रहा है। अमेरिका का मानना है कि यदि इस यूरेनियम का स्तर और बढ़ता है तो इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।
हालांकि ईरान लगातार दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
घरेलू राजनीति भी बनी वजह
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान में जमीनी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अमेरिकी जनता का एक बड़ा वर्ग था। कई सर्वेक्षणों में भी ईरान के खिलाफ प्रत्यक्ष युद्ध को लेकर अमेरिकी नागरिकों ने विरोध जताया था।
यही कारण रहा कि ट्रंप प्रशासन ने संभावित सैन्य अभियान के बजाय कूटनीतिक और आर्थिक दबाव की रणनीति को प्राथमिकता दी।
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