Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली/ढाका। भारत और बांग्लादेश के बीच अवैध घुसपैठियों और सीमा सुरक्षा को लेकर तनाव के बीच नई दिल्ली में दोनों देशों के शीर्ष सीमा अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक चल रही है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के बीच डायरेक्टर जनरल स्तर की 57वीं बॉर्डर कोऑर्डिनेशन कॉन्फ्रेंस 8 जून से शुरू हुई है, जो 11 जून तक चलेगी।
बैठक में अवैध प्रवास, सीमा प्रबंधन, सुरक्षा सहयोग और कथित पुशबैक मामलों पर चर्चा की जा रही है।
BSF और BGB के बीच उच्चस्तरीय वार्ता
भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व BSF के महानिदेशक प्रवीण कुमार कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेशी पक्ष की अगुवाई BGB के महानिदेशक मेजर जनरल मोहम्मद अशरफुज़्ज़मान सिद्दीकी कर रहे हैं।
यह बैठक अगस्त 2025 में ढाका में हुई पिछली वार्ता के बाद आयोजित की जा रही है।
भारत ने दोहराई अपनी मांग
भारत सरकार लगातार बांग्लादेश से अपने नागरिकों की पहचान और सत्यापन करने की मांग कर रही है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि बांग्लादेश को कई सूची सौंपी जा चुकी हैं, लेकिन अभी तक पर्याप्त सहयोग नहीं मिला है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि भारत में गैरकानूनी रूप से रह रहे किसी भी विदेशी नागरिक के खिलाफ भारतीय कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी
बांग्लादेश की ओर से आरोप लगाया गया है कि महिलाओं और बच्चों को जबरन सीमा पार भेजने की कोशिशें हो रही हैं। इसके जवाब में BGB ने सीमा के 26 जिलों में अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं।
सीमा क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी भी बढ़ा दी गई है और स्थानीय समुदायों की मदद से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है।
बांग्लादेश सरकार का क्या है रुख?
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि ऐसे सभी मामलों को राजनयिक चैनलों के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि BGB सीमा की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है और किसी भी असामान्य गतिविधि का जवाब देने के लिए तैयार है।
वहीं विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के बिना किसी भी प्रकार का पुश-इन ऑपरेशन स्वीकार्य नहीं है और इससे दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
तारिक रहमान सरकार की प्राथमिकता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद, दोनों प्रधानमंत्री तारिक रहमान के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में उनके बयानों को बांग्लादेश सरकार की आधिकारिक सोच के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार फिलहाल अवैध नागरिकों की वापसी के मुद्दे पर सीधी सहमति देने के बजाय राजनयिक वार्ता और सत्यापन प्रक्रिया पर जोर देती दिखाई दे रही है।
सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवास बना प्रमुख मुद्दा
बैठक में सीमा पर बाड़ तोड़ने की घटनाएं, अवैध गतिविधियां, सीमा पार अपराध, विश्वास बहाली के उपाय और दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर भी चर्चा की जा रही है।
अब सबकी नजर इस चार दिवसीय बैठक के नतीजों पर है, क्योंकि अवैध घुसपैठ और नागरिकों की वापसी का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।
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