Khabrilaal News Desk :
वाराणसी – बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान, सारनाथ में धूमधाम से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान संस्थान के कुलपति प्रो. वाड्ंछुग दोर्जे नेगी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि “शांति भीतर है, बाहर नहीं”, यही महात्मा बुद्ध के दर्शन का मूल संदेश है।
आंतरिक शांति पर दिया जोर
प्रो. नेगी ने कहा कि मनुष्य अक्सर सुख और शांति को बाहरी वस्तुओं, धन और पद में खोजता है, जबकि वास्तविक शांति भीतर से आती है। उन्होंने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा, जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है, भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण की स्मृति में मनाई जाती है।
प्रदर्शनी और पत्रिका का विमोचन
इस अवसर पर संस्थान की शोध पत्रिका “धी” का 66वां अंक बुद्ध को समर्पित किया गया। साथ ही प्रसिद्ध चित्रकार हरि दर्शन सांख्य की चित्र प्रदर्शनी “हिमालय: अध्यात्म का पवित्र मौन और शांति” का उद्घाटन भी किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भोटी भाषा में पारंपरिक मंत्रोच्चारण से हुई।
विशिष्ट अतिथियों ने रखे विचार
मुख्य अतिथि हरिगोविंद बौद्ध ने कहा कि आज के तनाव और हिंसा से भरे दौर में बुद्ध के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। मुख्य वक्ता भिक्षु डॉ. के. सिरी सुमेध थेरो ने करुणा और अहिंसा के संदेश को शांति की आधारशिला बताया।
विशिष्ट अतिथि विश्व भूषण मिश्र ने “अप्प दीपो भव” का उल्लेख करते हुए युवाओं को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। वहीं प्रो. सदानंद शाही ने बुद्ध की करुणा को पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन के लिए आवश्यक बताया।
बड़ी संख्या में लोग रहे उपस्थित
कार्यक्रम में सैकड़ों लामा, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत कुलसचिव डॉ. सुनीता चंद्रा ने किया, जबकि संचालन डॉ. रवि गुप्त मौर्य और धन्यवाद ज्ञापन राजेश कुमार सिंह ने किया।
संवादाता - एस बी सिंह (निडर)
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