Khabrilaal News Desk :
वाराणसी - में श्रीविद्यामठ में आयोजित एक विशेष समारोह में परमधर्माधीश्वर ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज ने गौप्रहरी प्रतियोगिता के विजेता छात्र-छात्राओं को स्मृति चिन्ह एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया।
विद्यालयों में आयोजित हुई थी प्रतियोगिता
गौरतलब है कि श्रीगुरुकुलम न्यास द्वारा गौ माता को राष्ट्रमाता एवं राज्यमाता का दर्जा दिलाने और गोकशी पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए जनजागरण के उद्देश्य से वाराणसी जिले के विभिन्न विद्यालयों में गौ प्रहरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसमें कक्षा 3 से 12 तक के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
गौमाता के महत्व पर शंकराचार्य जी का संबोधन
इस अवसर पर शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में गौमाता को मात्र एक पशु नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति और सृष्टि की आधारशिला के रूप में देखा जाता है। उन्होंने कहा कि वैदिक काल से लेकर आज तक गौमाता भारतीय समाज, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और आध्यात्मिक जीवन का केंद्र रही हैं।
गौ संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और सृष्टि के कल्याण से जुड़ा हुआ
उन्होंने यह भी कहा कि गौ संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और सृष्टि के कल्याण से जुड़ा हुआ है। वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था पर भी उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को गौमाता के महत्व को सीमित रूप में बताया जा रहा है, जबकि उनका व्यापक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व है।
संस्था ने जताया समर्थन
श्री गुरुकुलम के अध्यक्ष अभय शंकर तिवारी ने कहा कि यह प्रतियोगिता शंकराचार्य जी के गौ प्रतिष्ठा आंदोलन के समर्थन में एक छोटा प्रयास है। इसके माध्यम से समाज में गौमाता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन अनिल कुमार जी ने किया, जबकि समन्वयक विक्रम त्रिवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर श्रीमठ के उत्तराधिकारी राघव दास जी महाराज, परमात्मानंद जी महाराज, त्रिभुवन जी, बृजेश सेठ, अभिषेक सिंह, सोनू मौर्य, श्रेया श्रीवास्तव, उपेंद्र चौधरी, अम्बरीष कुमार राय, ब्रह्मानंद शुक्ल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी ने दी जानकारी
कार्यक्रम की जानकारी शंकराचार्य जी महाराज के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय द्वारा दी गई।
संस्कृति संरक्षण की दिशा में पहल
यह आयोजन न केवल छात्रों के ज्ञान का आकलन करने का माध्यम बना, बल्कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।
Comments (0)