Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 लागू होने के बाद महिलाओं के खिलाफ धोखे से बनाए गए शारीरिक संबंधों को लेकर कानून और अधिक स्पष्ट एवं सख्त हो गया है। नई संहिता की धारा 69 के तहत शादी का झूठा वादा कर किसी महिला से शारीरिक संबंध बनाना एक विशिष्ट आपराधिक अपराध माना गया है।
यह प्रावधान 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता का हिस्सा है और इसका उद्देश्य महिलाओं को ऐसे मामलों में कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है, जहां विवाह का झांसा देकर उनका शोषण किया जाता है।
क्या कहती है BNS की धारा 69?
धारा 69 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी महिला से विवाह करने का ऐसा वादा करता है, जिसे पूरा करने की उसकी शुरुआत से कोई मंशा नहीं होती, और उसी झूठे वादे के आधार पर महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए राजी करता है, तो यह अपराध माना जाएगा।
कानून के अनुसार ऐसे मामले बलात्कार की परिभाषा से अलग श्रेणी में रखे गए हैं, लेकिन इन्हें गंभीर आपराधिक कृत्य माना गया है।
किन परिस्थितियों में लागू होगी धारा 69?
धारा 69 के तहत निम्न परिस्थितियां अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं—
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शादी का झूठा वादा कर संबंध बनाना।
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नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन देकर संबंध स्थापित करना।
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पदोन्नति या अन्य लाभ का लालच देना।
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अपनी वास्तविक पहचान, नाम या धर्म छिपाकर विवाह का प्रलोभन देना।
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शुरुआत से ही विवाह की मंशा न रखते हुए महिला को धोखे में रखना।
कितनी हो सकती है सजा?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत दर्ज अपराध—
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संज्ञेय (Cognizable) है।
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गैर-जमानती (Non-Bailable) है।
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इसकी सुनवाई सत्र न्यायालय में होती है।
दोष सिद्ध होने पर आरोपी को अधिकतम 10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माने की सजा हो सकती है।
अदालत किन बातों पर करती है विचार?
ऐसे मामलों में न्यायालय आमतौर पर निम्न बिंदुओं की जांच करता है—
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क्या विवाह का वादा शुरुआत से ही झूठा था?
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क्या आरोपी का उद्देश्य केवल शारीरिक संबंध बनाना था?
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क्या महिला ने उसी वादे के भरोसे सहमति दी?
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क्या बाद की परिस्थितियों के कारण विवाह नहीं हो पाया या पहले से ही धोखे की योजना थी?
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क्या आरोपी ने अपनी पहचान या वैवाहिक स्थिति छिपाई थी?
IPC से BNS में क्या बदला?
पहले ऐसे मामलों को मुख्य रूप से भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 90 और बलात्कार से संबंधित प्रावधानों के तहत देखा जाता था। अब भारतीय न्याय संहिता ने धारा 69 के रूप में इसे अलग अपराध की श्रेणी में शामिल कर दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जांच एजेंसियों और अदालतों को ऐसे मामलों में स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा तथा महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
महिलाओं की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान
धारा 69 का मूल उद्देश्य उन मामलों में कार्रवाई सुनिश्चित करना है, जहां किसी महिला के विश्वास का दुरुपयोग कर विवाह का झूठा सपना दिखाया गया हो। हालांकि प्रत्येक मामले में अदालत तथ्यों, साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर यह तय करती है कि यह सामान्य संबंध विवाद है या वास्तव में धोखाधड़ी एवं शोषण का मामला।
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