khabarilaal news desk:-
वाराणसी। ट्रांसजेंडर सेल, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ एवं प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को 'पहचानों के साथी' पहल के अंतर्गत मीडिया पेशेवरों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य पत्रकारों, संपादकों, कंटेंट क्रिएटर्स एवं अन्य मीडिया कर्मियों का एक सहयोगी नेटवर्क तैयार करना है, जो LGBTQIA+ समुदायों से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील, सम्मानजनक और समावेशी रिपोर्टिंग को बढ़ावा दे सके।
जेंडर भूमिकाओं एवं जेंडर बाइनरी का निर्माण पितृसत्तात्मक सोच का परिणाम
ट्रांसजेंडर सेल के समन्वयक प्रो. संजय ने बताया कि कशी विद्यापीठ में ट्रांसजेंडर सेल कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी के निर्देशन में जुलाई 2023 से ट्रांसजेंडर एवं क्वीयर तथा अन्य यौनिक पहचान रखने वाले विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा की और प्रेरित करने, उन्हें गरिमा युक्त करियर का चुनाव करने एवं उनके खिलाफ होने वाली हिंसा और भेदभाव को समाप्त कर एक समावेशी माहौल तैयार करने के लिए स्थापित किया गया है। प्रो. संजय ने बताया कि जेंडर भूमिकाओं एवं जेंडर बाइनरी का निर्माण पितृसत्तात्मक सोच का परिणाम है। कोई भी व्यक्ति अपने चॉइस से नॉन बाइनरी पर्सन हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक जेंडर एवं यौन विविधता पर बच्चों एवं युवाओं को शिक्षित करने की आवश्यकता है।
LGBTQIA+ समुदायों के जीवन-अनुभवों, चुनौतियों और उपलब्धियों को सही संदर्भ और सम्मान के साथ प्रस्तुत करना समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

इस मौके पर प्रिज्मैटिक फाउंडेशन के नीति ने बताया कि मीडिया समाज में जनमत निर्माण और सामाजिक दृष्टिकोणों को प्रभावित करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। LGBTQIA+ समुदायों के जीवन-अनुभवों, चुनौतियों और उपलब्धियों को सही संदर्भ और सम्मान के साथ प्रस्तुत करना समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यशाला में प्रतिभागियों को LGBTQIA+ समुदाय की विविध पहचानों, जेंडर और लैंगिकता की बुनियादी समझ, समावेशी भाषा के प्रयोग, नैतिक रिपोर्टिंग और समुदायों के प्रतिनिधित्व से जुड़े विषयों पर जानकारी प्रदान की गयी। सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को यह समझने का माहौल बना कि समाचारों, तस्वीरों और सार्वजनिक विमर्श में LGBTQIA+ समुदायों का प्रतिनिधित्व किस प्रकार अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया जा सकता है।
ट्रांस जेंडर जीवन की चुनौतियों से जितना परिचित होंगे उतना उनके प्रति हमारी सामाजिक सोच होगी समृद्ध

प्रो. अनुराग कुमार ने कहा कि हम ट्रांस जेंडर जीवन की चुनौतियों से जितना परिचित होंगे उतना उनके प्रति हमारी सामाजिक सोच समृद्ध होगी। उनकी चुनौती घर से शुरू होकर समाज तक विस्तार पाती है। इस दुरूह जीवन में अस्मिता की तलाश और कैरियर का निर्माण निरंतर जटिल से जटिलतम प्रक्रिया का स्वरूप धारण करता है। इस समूह पर बनी बनाई धारणाओं को तोड़े बिना संवाद का उचित प्रतिफल प्राप्त नहीं हो सकता। ट्रांस जेंडर अस्मिता की स्वीकृति ही समूह के प्रति समावेशी सफलता है। प्रिज्मैटिक फाउंडेशन से टैन ने कार्यक्रम में "LGBTQIA+ से परिचय", "शब्दावली बाज़ार", "हेडलाइन: पास या फेल" तथा "नज़र और नज़रिया" जैसी गतिविधियां कराई। कार्यक्रम का संचालन रूमान और स्वागत अनामिका ने किया
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