Khabarilaal News Desk :
इस्लामाबाद। अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा इंडो-पैसिफिक कमांड के नाम से ‘इंडो’ शब्द हटाने के फैसले पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार ने भारत पर तंज कसा है। हालांकि उन्होंने सीधे भारत का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी टिप्पणी को भारत की वैश्विक भूमिका और रणनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
अमेरिकी सैन्य कमांड का पुराना नाम फिर बहाल
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को घोषणा की कि उसके सबसे बड़े सैन्य कमांड US Indo-Pacific Command का नाम बदलकर फिर से US Pacific Command कर दिया गया है।
अमेरिकी रक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव केवल नाम तक सीमित है। इससे कमांड की जिम्मेदारियों, संचालन व्यवस्था या रणनीतिक दायरे में कोई बदलाव नहीं होगा।
नाम बदलने के फैसले पर पाकिस्तान ने जताई प्रतिक्रिया
अमेरिकी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री Hina Rabbani Khar ने कहा कि किसी देश के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति होगी यदि उसका राष्ट्रीय गौरव और महत्व किसी विदेशी शक्ति द्वारा दिए गए नाम या पहचान पर निर्भर हो।
उन्होंने कहा कि देशों की अहमियत उनके फैसलों और नीतियों से तय होनी चाहिए, न कि किसी रणनीतिक फ्रेमिंग या नैरेटिव से।
भारत को लेकर खार ने दिया विवादित बयान
हिना रब्बानी खार ने आगे कहा कि किसी भी देश को उभरते प्रतिद्वंद्वियों के डर का फायदा उठाकर अपना महत्व बढ़ाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दक्षिण एशिया का क्षेत्र एक दिन ऐसी सोच से मुक्त होगा जो भूगोल और वास्तविकताओं को नकारती है।
उनके इस बयान को भारत पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।
ब्रह्म चेलानी ने खार को दिया करारा जवाब
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने हिना रब्बानी खार के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह भू-राजनीति की अधूरी समझ को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक अवधारणा का उद्देश्य हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा को एक साझा रणनीतिक ढांचे में जोड़ना था। इसके पीछे चीन का बढ़ता समुद्री विस्तार और जापान सहित कई देशों की सुरक्षा चिंताएं थीं।
इंडो-पैसिफिक अवधारणा के पीछे क्या थी रणनीति
ब्रह्म चेलानी के अनुसार, राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने पहले कार्यकाल में US Pacific Command का नाम बदलकर US Indo-Pacific Command किया था ताकि हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र के साझा रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अब पुराने नाम की वापसी से प्रशांत और हिंद महासागर की सुरक्षा अवधारणाओं को वैचारिक रूप से अलग करने का संदेश जाता है।
चीन और QUAD से भी जुड़ा है पूरा मामला
चेलानी ने कहा कि इंडो-पैसिफिक अवधारणा और QUAD ढांचे का चीन लगातार विरोध करता रहा है। ऐसे में अमेरिकी कमांड के नाम में बदलाव के पीछे की रणनीतिक सोच का विश्लेषण करना स्वाभाविक है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों को भू-राजनीतिक विषयों की गहरी समझ नहीं है, उन्हें इस तरह की सतही टिप्पणियों से बचना चाहिए।
नाम परिवर्तन के रणनीतिक असर पर जारी है बहस
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सैन्य कमांड के नाम में बदलाव महज प्रशासनिक निर्णय नहीं है। इसका असर क्षेत्रीय रणनीति, इंडो-पैसिफिक अवधारणा और चीन के बढ़ते प्रभाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
इसी वजह से इस फैसले पर अमेरिका, भारत, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के रणनीतिक हलकों में चर्चा जारी है।
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