khabarilaal news desk:-

वाराणसी। देवा इंटरनेशनल सोसायटी फॉर चाइल्ड केयर, वाराणसी द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देवा ग्राम (बचाव) स्थित देवा संस्थान में विशेष योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों एवं उनके अभिभावकों ने 'दिव्य योग' का सामूहिक प्रदर्शन कर योग के महत्व का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय विद्यालय संगठन की पूर्व प्राचार्य श्रीमती रीना मुखर्जी तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में दिव्यांग श्री कृष्णा उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष एवं प्रमुख चिकित्सा मनोवैज्ञानिक एवं मनोचिकित्सक डॉ. तुलसी ने अपने संबोधन में बताया कि योग भारत की प्राचीन आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक परंपरा है, जिसका उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा का संतुलित विकास करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग को वैश्विक पहचान मिली है और विश्वभर में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है।

प्रभावित बच्चों के लिए पिछले 20 वर्षों के शोध के आधार पर 'दिव्य योग' विकसित किया गया

डॉ. तुलसी ने बताया कि दिव्यांग बच्चों, विशेषकर एडीएचडी (ADHD), ऑटिज्म एवं बौद्धिक दिव्यांगता से प्रभावित बच्चों के लिए पिछले 20 वर्षों के शोध के आधार पर 'दिव्य योग' विकसित किया गया है। इसमें हठयोग, ध्यान योग, नाद योग, कर्मयोग, भक्ति योग के साथ संतुलित आहार एवं व्यवहार संबंधी विशेष प्रशिक्षण शामिल है।

नियमित दिव्य योग, उचित आहार और व्यवहार में परिवर्तन के माध्यम से उल्लेखनीय सुधार

उन्होंने बताया कि पिछले 15 से 20 वर्षों में लगभग 400 दिव्यांग बच्चों पर किए गए अभ्यास में बिना दवा के केवल नियमित दिव्य योग, उचित आहार और व्यवहार में परिवर्तन के माध्यम से उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। बच्चों की हाइपर एक्टिविटी में कमी, ध्यान एवं एकाग्रता में वृद्धि, संवाद क्षमता का विकास, आत्मविश्वास में बढ़ोतरी तथा सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन दर्ज किए गए हैं। साथ ही अभिभावकों में भी अपने बच्चों के प्रति स्वीकार्यता और सकारात्मक सोच विकसित हुई है।

नियमित दिव्य योग से उनके बच्चों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव

कार्यक्रम के दौरान कई अभिभावकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि नियमित दिव्य योग से उनके बच्चों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव आया है। डॉ. तुलसी ने अन्य संस्थाओं से भी इस शोध आधारित योग पद्धति को अपनाने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक दिव्यांग बच्चों को इसका लाभ मिल सके और वे आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें।कार्यक्रम के अंत में संस्था के सचिव श्री श्यामलाल ने सभी अतिथियों, अभिभावकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

Link Copied to Clipboard!

Comments (0)

10 + 3 = ?
No comments yet. Be the first to share your thoughts!