khabarilaal news desk:-
वाराणसी, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत लॉन में आज द्वादश अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस एवं त्रिदिवसीय योग महोत्सव का भव्य समापन कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के आचार्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए सामूहिक योगाभ्यास किया तथा योग को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।
वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगलाचरण के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारम्भ

कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंत्रोच्चार एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। योग प्रशिक्षकों में क्रमशः डॉ राजकुमार मिश्र, आदित्य कुमार के निर्देशन में प्रतिभागियों ने सूर्य नमस्कार, ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, वज्रासन तथा विभिन्न प्राणायामों का अभ्यास किया। सम्पूर्ण परिसर योग, अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा से अनुप्राणित दिखाई दिया।
“योग भारतीय संस्कृति की आत्मा, मानवता के उत्कर्ष का विज्ञान और विश्वशांति का आधार है”— कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा
कार्यक्रम का मार्गदर्शन करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ऋषि-परम्परा का अमूल्य उपहार है, जो शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के मध्य संतुलन स्थापित करता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि संतुलित, संस्कारित और मूल्यनिष्ठ जीवन की आवश्यकता बन गया है।
व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है योग

उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है, परिवार में संस्कारों को सुदृढ़ करता है, समाज में समरसता का भाव विकसित करता है तथा राष्ट्र को नैतिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। योग का वास्तविक उद्देश्य केवल रोगों से मुक्ति नहीं, बल्कि जीवन में संयम, सद्भाव और आत्मबोध की स्थापना है। भारतीय संस्कृति के “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे आदर्श योग की भावना में ही साकार होते हैं।
“योग अनुशासित और स्वस्थ समाज के निर्माण का सशक्त माध्यम है” — कुलसचिव राकेश कुमार(वरिष्ठ आईएसएस)
कुलसचिव श्री राकेश कुमार ने कहा कि योग व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास का आधार है। नियमित योगाभ्यास से जीवन में सकारात्मकता, एकाग्रता और आत्मविश्वास का विकास होता है, जिससे स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में सहायता मिलती है।
“योग आत्मानुभूति से आत्मोन्नति की यात्रा है” — प्रो. जितेन्द्र कुमार

वरिष्ठ आचार्य एवं वैज्ञानिक प्रो. जितेन्द्र कुमार ने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मसाक्षात्कार की साधना है। यह व्यक्ति को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक उन्नयन की दिशा में अग्रसर करता है।
“प्रकृति, संस्कृति और जीवन के मध्य संतुलन स्थापित करता है योग” — प्रो. रमेश प्रसाद
श्रमण विद्या संकाय प्रमुख प्रो. रमेश प्रसाद ने कहा कि योग मनुष्य को प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है। यह स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है।
“कुण्डलिनी जागरण और चक्र चेतना का विज्ञान है योग” — डॉ. दुर्गेश पाठक
कार्यक्रम के संयोजक एवं योग विज्ञान केन्द्र के निदेशक डॉ. दुर्गेश पाठक ने कहा कि योग ऊर्जा के सूक्ष्म केन्द्रों अर्थात् चक्रों को जागृत करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया है। साधना, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से कुण्डलिनी शक्ति का जागरण साधक को मानसिक, आध्यात्मिक एवं चेतनात्मक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।
“प्रतिदिन योग करेंगे, निरोगी परिवार और स्वस्थ समाज का निर्माण करेंगे” — सामूहिक संकल्प..
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे प्रतिदिन योग, प्राणायाम एवं ध्यान का अभ्यास करेंगे, अपने परिवार एवं समाज को योग से जोड़ेंगे तथा स्वस्थ, संस्कारित और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देंगे।कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक दिनेश कुमार,प्रो महेन्द्र पाण्डेय, प्रो हीरक कान्ति चक्रवर्ती,प्रो शैलेश कुमार प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ. रवीशंकर पाण्डेय, श्री मोहित मिश्र, अजय कुमार पाण्डेय, प्रभु नाथ यादव सहित विश्वविद्यालय के अनेक आचार्य, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
विश्वशांति, मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्र की समृद्धि की मंगलकामना के साथ कार्यक्रम का समापन

अंत में विश्वशांति, मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण तथा राष्ट्र की समृद्धि की मंगलकामना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। योग की इस सामूहिक साधना ने यह संदेश दिया कि भारतीय ज्ञान परम्परा का यह अमूल्य उपहार आज भी सम्पूर्ण मानवता के लिए उतना ही प्रासंगिक और उपयोगी है, जितना प्राचीन काल में था।सामूहिक राष्ट्रगान के साथ योग प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
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