Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद एक बार फिर शहीद सैनिकों को मिलने वाली आर्थिक सहायता, सम्मान राशि और फैमिली पेंशन के नियमों पर बहस तेज हो गई है। बिहार सरकार की ओर से दी गई 21 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक शुभम की पत्नी को सौंपे जाने के बाद उनके माता-पिता ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
परिजनों का कहना है कि शहीद बेटे के माता-पिता होने के बावजूद उन्हें किसी तरह की आर्थिक सहायता या सम्मान राशि के वितरण में शामिल नहीं किया गया।
21 लाख की सहायता राशि बनी विवाद की वजह
असम के जोरहाट में हुए भारतीय वायुसेना के AN-32 विमान हादसे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद बिहार सरकार ने 21 लाख रुपये की सम्मान राशि देने की घोषणा की।
प्रशासन द्वारा यह राशि शुभम की पत्नी को सौंप दी गई। इसके बाद शुभम के पिता ने सवाल उठाते हुए कहा कि माता-पिता को भी सहायता राशि में हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि बेटे की शादी की जानकारी तक उन्हें नहीं थी और सहायता राशि मिलने के बाद बहू अपने मायके चली गई।
पहले भी उठ चुका है ऐसा मामला
यह पहला मौका नहीं है जब किसी शहीद सैनिक के परिवार में आर्थिक सहायता को लेकर विवाद सामने आया हो।
साल 2024 में सियाचिन में शहीद हुए कैप्टन अंशुमान सिंह के माता-पिता ने भी इसी तरह की शिकायत की थी। उनका आरोप था कि बेटे की शहादत के बाद मिलने वाली सहायता राशि और अन्य लाभ केवल बहू को मिले और वह मायके चली गई।
उस समय भी शहीद सैनिकों की पेंशन और सहायता राशि के नियमों में बदलाव की मांग उठी थी।
क्या है NOK (Next of Kin) का नियम?
भारतीय सशस्त्र बलों में भर्ती के समय प्रत्येक सैनिक या अधिकारी को अपने निकटतम परिजन (Next of Kin - NOK) की जानकारी देनी होती है।
- अविवाहित सैनिक के लिए माता या पिता NOK हो सकते हैं।
- शादी के बाद पत्नी प्राथमिक NOK बन जाती है।
- शहादत या मृत्यु की स्थिति में अधिकांश सरकारी लाभ NOK को ही मिलते हैं।
यही नियम वर्तमान विवाद की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।
शहीद सैनिकों को मिलने वाली पेंशन के प्रकार
सैनिकों की मृत्यु या शहादत की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग प्रकार की पेंशन दी जाती है।
Ordinary Family Pension
सामान्य मृत्यु या बीमारी की स्थिति में अंतिम वेतन का लगभग 30 प्रतिशत।
Special Family Pension
ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी से जुड़े कारणों से मृत्यु होने पर अंतिम वेतन का लगभग 60 प्रतिशत।
Liberalised Family Pension
युद्ध या सैन्य अभियान में शहादत की स्थिति में अंतिम वेतन का 100 प्रतिशत।
इन सभी मामलों में प्राथमिक लाभार्थी NOK ही माना जाता है।
माता-पिता को क्या मिलता है?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि सैनिक विवाहित है तो फैमिली पेंशन का अधिकार सामान्य तौर पर पत्नी को मिलता है।
हालांकि सैनिक अपनी वसीयत और नामांकन के जरिए यह तय कर सकता है कि:
- बीमा राशि
- पीएफ
- ग्रेच्युटी
- एक्स-ग्रेशिया भुगतान
किसे और कितने प्रतिशत मिले।
यदि माता-पिता आश्रित हैं तो उन्हें चिकित्सा सुविधाएं भी मिलती रहती हैं।
रक्षा मंत्रालय कर रहा बदलाव पर विचार
कैप्टन अंशुमान सिंह मामले के बाद सशस्त्र बलों की ओर से रक्षा मंत्रालय को सुझाव भेजा गया था कि शहीद सैनिकों की आर्थिक सहायता और पेंशन का लाभ पत्नी और माता-पिता दोनों को मिले, इसके लिए नियमों में संशोधन किया जाए।
सूत्रों के अनुसार रक्षा मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
शुभम केस ने फिर खड़े किए बड़े सवाल
फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद उठा यह विवाद एक बार फिर उस संवेदनशील मुद्दे को सामने ले आया है कि शहीद सैनिक के जाने के बाद आर्थिक सहायता और सम्मान राशि का वास्तविक अधिकार किसे मिलना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए पेंशन और सहायता राशि से जुड़े नियमों को अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है।
KEY POINTS
- फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद विवाद
- बिहार सरकार की 21 लाख रुपये की सहायता राशि पत्नी को मिली
- माता-पिता ने आर्थिक सहायता वितरण पर सवाल उठाए
- कैप्टन अंशुमान सिंह मामले जैसी बहस फिर शुरू
- NOK नियमों में बदलाव पर रक्षा मंत्रालय कर रहा विचार
- पत्नी और माता-पिता दोनों के अधिकारों पर नई चर्चा
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