Khabarilaal News Desk :
नई दिल्ली। 2029 लोकसभा चुनाव भले अभी तीन साल दूर हों, लेकिन चुनाव आयोग ने इसकी तैयारियां तेज कर दी हैं। बढ़ती मतदाता संख्या, नए मतदान केंद्रों की जरूरत और पुरानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की रिटायरमेंट को देखते हुए चुनाव आयोग ने केंद्र सरकार से ₹500 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त राशि की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक यह रकम नई ईवीएम खरीदने और चुनावी ढांचे को मजबूत बनाने के लिए खर्च की जाएगी। चुनाव आयोग का अनुमान है कि 2029 तक देश में मतदान केंद्रों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
2029 चुनाव के लिए लाखों नई EVM खरीदने की तैयारी

रिपोर्ट्स के अनुसार चुनाव आयोग 3.57 लाख नई बैलट यूनिट और 1.25 लाख कंट्रोल यूनिट खरीदने की योजना पर काम कर रहा है।
बैलट यूनिट और कंट्रोल यूनिट मिलकर पूरी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तैयार करती हैं।
इन मशीनों की खरीद और सप्लाई की प्रक्रिया पूरी कर मार्च 2027 तक उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है ताकि 2029 के आम चुनाव से पहले पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित की जा सके।
चुनाव आयोग ने क्यों मांगे ₹500 करोड़ से ज्यादा?
चुनाव आयोग ने सरकार को भेजे प्रस्ताव में कहा है कि आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को बिना किसी तकनीकी बाधा के सफलतापूर्वक कराने के लिए अतिरिक्त मशीनों की आवश्यकता होगी।
बताया जा रहा है कि नई मशीनों की खरीद, परीक्षण और वितरण पर कुल लागत ₹500 करोड़ से अधिक बैठ सकती है।
सूत्रों के अनुसार व्यय विभाग पहले ही लगभग ₹512.4 करोड़ की वित्तीय मंजूरी दे चुका है।
बैलट यूनिट और कंट्रोल यूनिट की नई कीमतें तय
चुनाव आयोग द्वारा प्रस्तावित खरीद में मशीनों की कीमतें भी तय कर दी गई हैं।
- एक बैलट यूनिट की कीमत: ₹8,577
- एक कंट्रोल यूनिट की कीमत: ₹9,737
दिलचस्प बात यह है कि यह कीमतें 2024 की तुलना में क्रमशः 6% और 7% कम बताई जा रही हैं।
15 साल बाद रिटायर हो जाएंगी पुरानी EVM
वर्तमान में चुनाव आयोग के पास:
- 30.77 लाख बैलट यूनिट
- 22.14 लाख कंट्रोल यूनिट
- लगभग 24 लाख VVPAT मशीनें
उपलब्ध हैं।
इनमें से बड़ी संख्या ऐसी मशीनों की है जिन्हें 2013-14 के दौरान खरीदा गया था और उनकी निर्धारित सेवा अवधि 2029 तक पूरी हो जाएगी।
चुनाव आयोग के तकनीकी मानकों के अनुसार एक EVM की औसत उपयोग अवधि लगभग 15 वर्ष होती है।
मतदान केंद्रों की संख्या में होगा बड़ा उछाल
नई मशीनों की आवश्यकता की सबसे बड़ी वजह मतदान केंद्रों की संख्या में संभावित भारी वृद्धि है।
पहले एक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1500 मतदाता निर्धारित थे।
अब यह सीमा घटाकर 1200 मतदाता प्रति बूथ कर दी गई है।
इस बदलाव के कारण देशभर में हजारों नए मतदान केंद्र बनाने होंगे।
2024 के लोकसभा चुनाव में लगभग 10.53 लाख मतदान केंद्र बनाए गए थे।
अनुमान है कि 2029 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 15.39 लाख तक पहुंच सकती है।
46% बढ़ सकता है चुनावी ढांचा
चुनाव आयोग के अनुमान के मुताबिक 2029 तक मतदान केंद्रों की संख्या में करीब 46% की बढ़ोतरी हो सकती है।
ऐसी स्थिति में पुरानी मशीनों के रिटायर होने के बाद लाखों नई बैलट यूनिट और कंट्रोल यूनिट की आवश्यकता पड़ेगी।
यही वजह है कि आयोग अभी से संसाधनों की व्यवस्था करने में जुट गया है।
2029 चुनाव को लेकर आयोग की बड़ी रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल मशीन खरीदने की प्रक्रिया नहीं बल्कि 2029 के आम चुनावों की व्यापक रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है।
मतदाता संख्या लगातार बढ़ रही है और चुनावी प्रबंधन को तकनीकी रूप से अधिक मजबूत बनाना समय की जरूरत बन चुका है।
नई ईवीएम और VVPAT मशीनों के जरिए चुनाव आयोग भविष्य के चुनावों को अधिक सुचारू, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
चुनावी तैयारियों का नया अध्याय
2029 लोकसभा चुनाव को लेकर चुनाव आयोग की यह पहल बताती है कि देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक आयोजन की तैयारी वर्षों पहले शुरू हो जाती है।
नई मशीनों की खरीद, मतदान केंद्रों का विस्तार और तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाना आने वाले चुनावों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो चुका है।
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