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बनारस में नगर निगम वाराणसी द्वारा बनारस में मीट मांस मछली बेचने पर रोक के मुद्दे पर मीट मछली व्यवसायियों ने विपक्षी पार्षदों के अगुवाई में कांग्रेस,आप,एपवा और सामाजिक/व्यवसायिक संगठन के साथ नगर आयुक्त श्री हिमांशु नागपाल से मिलकर वार्ता हुई और एक ज्ञापन पत्र भी सौंपा गया।
शहर की हालात को बिगाड़ना भी चाहते है अवांछनीय तत्व
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कुछ अवांछनीय तत्व शहर की हालात को बिगाड़ना भी चाहते है।इस विषय पर चिंता व्यक्त की गई।विपक्षी पार्षद दल के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने इस निर्णय को गरीबों की आजीविका, संविधान प्रदत्त अधिकारों तथा वाराणसी की साझा सांस्कृतिक विरासत पर हमला बताया।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नगर निगम का तर्क पूरी तरह विरोधाभासी
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि नगर निगम का तर्क पूरी तरह विरोधाभासी है। यदि लाइसेंसधारी दुकानों से धार्मिक नगरी और पर्यटकों को कोई परेशानी नहीं है, तो बिना लाइसेंस वाले विक्रेताओं से ही परेशानी होने का दावा कैसे किया जा सकता है? सच्चाई यह है कि वर्षों से लाइसेंस जारी करना और उनका नवीनीकरण करना स्वयं नगर निगम की जिम्मेदारी रही है। प्रशासनिक विफलता की सजा गरीब मेहनतकश लोगों को नहीं दी जा सकती।
मछली और मांस व्यापार से जुड़ी है हजारों परिवारों की रोजी-रोटी
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी मछली और मांस व्यापार से जुड़ी है। इनमें मल्लाह, निषाद, बंगाली, मुस्लिम तथा अन्य मेहनतकश समुदाय शामिल हैं। धार्मिक भावनाओं के नाम पर इन समुदायों को शहर से बाहर धकेलने की कोशिश सामाजिक अन्याय और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
भारत का संविधान किसी भी नागरिक को देता है वैध व्यवसाय करने, अपनी पसंद का भोजन करने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार
पार्षद दल ने स्पष्ट कहा कि भारत का संविधान किसी भी नागरिक को वैध व्यवसाय करने, अपनी पसंद का भोजन करने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार देता है। किसी भी सरकार या प्रशासन को यह अधिकार नहीं है कि वह गरीबों की आजीविका को बलि का बकरा बनाकर दिखावटी सांस्कृतिक राजनीति करे।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मछली, मीट एवं मांस विक्रेताओं को शहर से बाहर करने का प्रस्ताव तत्काल वापस लिया जाए
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मछली, मीट एवं मांस विक्रेताओं को शहर से बाहर करने का प्रस्ताव तत्काल वापस लिया जाए, सभी पात्र विक्रेताओं का विशेष अभियान चलाकर पंजीकरण एवं लाइसेंस जारी किया जाए और किसी भी गरीब परिवार की रोजी-रोटी पर बुलडोजर चलाने की कोशिश बंद की जाए।
वाराणसी किसी एक खान-पान, एक संस्कृति या एक समुदाय का शहर नहीं,
हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि वाराणसी किसी एक खान-पान, एक संस्कृति या एक समुदाय का शहर नहीं, बल्कि विविधताओं और सह-अस्तित्व की नगरी है। गरीबों के रोजगार और नागरिकों की खाने की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि नगर निगम ने अपने भेदभावपूर्ण निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया, तो व्यापक जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा और शहर का मेहनतकश समाज अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
हम मीट,मुर्गा,मछली के किसी भी वैध तरीके से व्यापार करने वाले व्यापारी के ख़िलाफ़ नहीं-नगर आयुक्त
प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के दौरान नगर आयुक्त श्री नागपाल ने कहा-हम मीट,मुर्गा,मछली के किसी भी वैध तरीके से व्यापार करने वाले व्यापारी के ख़िलाफ़ नहीं हैं।ज्ञापन देने वालों में प्रमुख रूप से राघवेंद्र चौबे,संजीव सिंह,अब्दुला खान,कुसुम वर्मा, धनंजय,गुलशन अली,मनीष शर्मा, रोजा मैथ्यूज,रमज़ान अली सुमित सोनकर,सनी सोनकर, ओकास अंसारी,प्रदीप राजभर, तुफैल अंसारी,आदि लोग शामिल रहे।
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