khabarilaal news desk:-

वाराणसी,।कृषि विज्ञान केन्द्र, वराणसी में संचालित मत्स्य आधारित समेकित कृषि प्रणाली मॉडल पर आधारित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन आज मुख्य अतिथि के रूप में सुरेश कुमार (उपनिदेशक मत्स्य, वाराणसी मंडल) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ नवीन कुमार सिंह द्वारा मुख्य अतिथि को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित करते हुए किया गया।

मत्स्य आधारित समेकित कृषि प्रणाली सीमांत किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक प्रभावी मॉडल

स्वागत संबोधन में डॉ. नवीन कुमार सिंह ने उपस्थित किसान प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि मत्स्य आधारित समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक प्रभावी मॉडल है। उन्होंने मत्स्य पालन, जल प्रबंधन तथा कृषि विविधीकरण के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।

भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र में किसानों के लिए कई लाभकारी योजनाएं की जा रही संचालित

मुख्य अतिथि श्री सुरेश कुमार ने अपने संबोधन में बताया कि भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मत्स्य क्षेत्र में किसानों के लिए कई लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने Pradhan Mantri Matsya Sampada Yojana, निषाद राज बोट योजना तथा मत्स्य पालक कल्याण योजना के अंतर्गत मिलने वाले अनुदान, बीमा, तालाब निर्माण, बीज, फीड एवं अन्य सहयोग योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। 

किसान वार्षिक रूप से ₹3.5 से 5 लाख तक की प्राप्त कर सकते हैं शुद्ध आय

प्रशिक्षण समन्वयक एवं केन्द्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. राहुल कुमार सिंह ने एक एकड़ मत्स्य आधारित समेकित कृषि प्रणाली मॉडल की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस मॉडल में लगभग 0.4 एकड़ में मत्स्य पालन, 0.2 एकड़ में बकरी पालन इकाई, 0.1 एकड़ में मुर्गी पालन, 0.1 एकड़ में वर्मी कम्पोस्ट इकाई तथा शेष क्षेत्र में सब्जी एवं फल उत्पादन को सम्मिलित कर किसान वार्षिक रूप से ₹3.5 से 5 लाख तक की शुद्ध आय प्राप्त कर सकते हैं।

समेकित प्रणाली में बकरी एवं मुर्गी पालन को आय का अतिरिक्त स्रोत

इस अवसर पर शस्य वैज्ञानिक डॉ अमितेश कुमार सिंह ने वर्मी कम्पोस्ट निर्माण की वैज्ञानिक विधि एवं इसके लाभों पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. पूजा सिंह ने समेकित प्रणाली में बकरी एवं मुर्गी पालन को आय का अतिरिक्त स्रोत बताते हुए इसकी तकनीकी जानकारी साझा की। वहीं श्रीप्रकाश सिंह ने प्राकृतिक खेती एवं समेकित कृषि प्रणाली की उपयोगिता विषय पर व्याख्यान दिया।

कम लागत में बहुआयामी कृषि मॉडल अपनाकर आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना

कार्यक्रम में केन्द्र के प्रक्षेत्र प्रबंधक राणा पियूष, देवमणि विश्वकर्मा सहित कुल 25 किसान प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को कम लागत में बहुआयामी कृषि मॉडल अपनाकर आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

Link Copied to Clipboard!

Comments (0)

8 + 7 = ?
No comments yet. Be the first to share your thoughts!