khabarilaal news desk:-

वाराणसी |चोलापुर थाना क्षेत्र के बड़ौदा यूपी बैंक की नियारडीह शाखा में गरीब और अशिक्षित ग्रामीणों के नाम पर फर्जी तरीके से ऋण स्वीकृत कर लाखों रुपये की हेराफेरी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू

न्यायालय के आदेश पर चोलापुर पुलिस ने बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, दो-तीन अज्ञात बैंक कर्मियों तथा तीन स्थानीय लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत विभिन्न गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक के रिकॉर्ड, ऋण संबंधी दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की गहन जांच में जुटी है।

नियमों की जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर एक संगठित गिरोह ने उसके परिवार के साथ लाखों रुपये की सुनियोजित धोखाधड़ी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कुरौली निवासी पप्पू गौंड पुत्र स्व. बचाऊ गौंड ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि वह गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करता है और बैंकिंग नियमों की जानकारी नहीं होने का फायदा उठाकर एक संगठित गिरोह ने उसके परिवार के साथ करोड़ों नहीं बल्कि लाखों रुपये की सुनियोजित धोखाधड़ी की। याचिका के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान उसकी पत्नी सविता देवी का बड़ौदा यूपी बैंक की नियारडीह शाखा में ऋण खाता खोला गया था, जिसमें करीब 1.75 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत हुई।

आरोपितों ने सविता देवी से कई बार हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए तथा बैंक कर्मियों की मिलीभगत से पूरी राशि निकालकर हड़पी 

आरोप है कि बैंक प्रक्रिया का हवाला देकर आरोपितों ने सविता देवी से कई बार हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए तथा बैंक कर्मियों की मिलीभगत से पूरी राशि निकालकर हड़प ली। शिकायतकर्ता को लंबे समय तक बैंक के चक्कर कटवाए जाते रहे। जब काफी समय बाद पप्पू गौंड बैंक पहुंचा तो उसे बताया गया कि उसकी पत्नी का ऋण खाता बंद हो चुका है। आरोप है कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने उसे संकटमोचन, बुलेट यादव और प्रदीप कुमार माली से संपर्क करने की सलाह देते हुए नया रास्ता निकालने का भरोसा दिया।

आरोप है कि बैंक पहुंचने पर फील्ड अधिकारी ने उसे बाहर बैठाया 

आरोपितों ने उसे विश्वास में लेकर 13 अप्रैल 2025 को उसके भाई महेन्द्र कुमार गौंड को बैंक ले जाने को कहा। आरोप है कि बैंक पहुंचने पर फील्ड अधिकारी ने उसे बाहर बैठा दिया और अंदर बैंक कर्मियों तथा आरोपितों ने महेन्द्र कुमार गौंड के नाम पर 1.95 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत करा लिया। आरोप है कि 15 अप्रैल 2025 को ऋण खाते से 1.65 लाख रुपये निकाल लिए गए और राशि का कोई हिसाब शिकायतकर्ता को नहीं दिया गया। जब उसने बैंक स्टेटमेंट मांगा तो उसे टाल दिया गया। 11 अगस्त 2025 को बैंक पहुंचने पर बताया गया कि संबंधित खाता बंद हो चुका है और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

पहले भी दर्ज हो चुका है मुकदमा

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता की मां हीरावती देवी के खाते से भी इसी तरह कथित धोखाधड़ी की गई थी। इस संबंध में 24 जुलाई 2025 को चोलापुर थाने में अपराध संख्या 317/2025 दर्ज हुआ था, जिसमें आरोपित संकटमोचन और प्रदीप कुमार माली के खिलाफ आरोपपत्र भी न्यायालय भेजा जा चुका है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एक खाता एनपीए घोषित कर दूसरे खाते से राशि समायोजित करने का खेल लगातार किया जाता रहा है।

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत बैंक से मांगी जानकारी

पप्पू गौंड का आरोप है कि मामले की जानकारी के लिए उसने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत बैंक से जानकारी मांगी, लेकिन स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। इसके बाद उसने स्वयं कुछ इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए, जिनमें बैंक अधिकारियों और आरोपितों के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी शामिल होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने बैंक स्टेटमेंट, आरटीआई से प्राप्त जवाब तथा अन्य दस्तावेज पुलिस और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा

स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता ने एसीजेएम प्रथम न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर चोलापुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने संकटमोचन, बुलेट यादव, प्रदीप कुमार माली, बड़ौदा यूपी बैंक नियारडीह शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक तथा दो-तीन अज्ञात बैंक कर्मियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) एवं 61(2) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में दर्ज कर लिया गया है मुकदमा

प्रभारी निरीक्षक चोलापुर सधुबन राम गौतम ने बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुपालन में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक चन्द्र भूषण को सौंपी गई है। बैंक के ऋण अभिलेख, खातों का विवरण, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। विवेचना में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित आरोपितों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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