Khabarilaal News Desk :

घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समाज और परिवारों की उस सोच पर गंभीर चिंता जताई है, जिसमें महिलाओं की शिकायतों को ‘समझौते’ के नाम पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि घरेलू हिंसा को दबाना एक खतरनाक सामाजिक विफलता है।

पति की सजा बरकरार, हत्या के मामले पर टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की हत्या और घरेलू क्रूरता के मामले में आरोपी पति की सजा को बरकरार रखा। आरोपी ने मामले को आत्महत्या साबित करने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।

पीड़िता की शिकायतों को किया गया नजरअंदाज

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने कई बार अपने परिवार से पति की हिंसा और दहेज उत्पीड़न की शिकायत की थी। इसके बावजूद रिश्तेदारों और गांव के लोगों ने समझौता कराने की कोशिश की और उसे बार-बार ससुराल भेजा गया।

‘समझौते’ की उम्मीद बनी दुखद अंत की वजह

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के परिजन यह मानते रहे कि हालात सुधर जाएंगे, लेकिन उनकी यह उम्मीद टूट गई और महिला की ससुराल में मौत हो गई। कोर्ट ने इसे समाज के लिए चेतावनी बताया।

परिवारों और समाज को दी सीख

बेंच ने कहा कि घरेलू हिंसा की शिकायतों को हल्के में लेना या समझौते के नाम पर दबाना भविष्य में गंभीर परिणाम ला सकता है। ऐसे मामलों में पीड़िता की बात को गंभीरता से लेना जरूरी है।

ट्विशा मामले पर भी जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा से जुड़े मामले में कहा कि ऐसी कहानियां फैलाना गलत है, जिनसे यह लगे कि न्यायपालिका आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और सभी पक्षों को बयानबाजी से बचना चाहिए।

 
 
Link Copied to Clipboard!

Comments (0)

1 + 10 = ?
No comments yet. Be the first to share your thoughts!