Khabarilaal News Desk :

राजस्थान में 30 मई को आए भीषण रेतीले तूफान ने लोगों को हैरान कर दिया। 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं ने कई इलाकों में दिन के समय अंधेरे जैसी स्थिति पैदा कर दी। 100 फीट तक ऊंचे धूल और रेत के गुबार दिखाई दिए, पेड़ उखड़ गए और कई कमजोर मकानों को नुकसान पहुंचा।

इस घटना के बाद लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि आखिर रेतीले बवंडर या सैंडस्टॉर्म आते कहां से हैं और इनके पीछे का विज्ञान क्या है?

क्या होता है रेतीला बवंडर?

रेतीला बवंडर या सैंडस्टॉर्म तब बनता है जब तेज हवाएं सूखी, बंजर और कम वनस्पति वाली जमीन पर बहती हैं। हवा मिट्टी, धूल और रेत के महीन कणों को उठाकर वातावरण में फैला देती है। यही कण मिलकर विशाल धूल के बादल बना देते हैं, जो कई किलोमीटर तक फैल सकते हैं।

आसान भाषा में कहें तो यह आसमान में बनने वाली "रेत की सुनामी" जैसा होता है, जो अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को धूल से ढक देता है।

कहां से आती है इतनी ज्यादा धूल?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हर साल लगभग 2 अरब टन रेत और धूल पृथ्वी के वातावरण में पहुंचती है। इनमें से करीब एक-चौथाई धूल अंततः महासागरों में जाकर मिल जाती है।

दुनिया की हवा में मौजूद कुल धूल का लगभग आधा हिस्सा अफ्रीका के विशाल सहारा रेगिस्तान से आता है। बाकी धूल मध्य पूर्व, मध्य एशिया, चीन और अन्य शुष्क क्षेत्रों से आती है।

हजारों किलोमीटर तक सफर करती है रेत

रेतीले तूफान के दौरान बड़े कण जल्दी जमीन पर गिर जाते हैं, लेकिन बेहद महीन कण 10 से 12 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर पहुंच सकते हैं। ये कण हवा के साथ हजारों किलोमीटर दूर तक यात्रा कर सकते हैं।

सहारा की धूल कई बार अटलांटिक महासागर पार करके दक्षिण अमेरिका और कैरिबियन द्वीपों तक पहुंच जाती है।

क्या रेतीले तूफान फायदेमंद भी होते हैं?

सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन रेतीले तूफान केवल नुकसान ही नहीं पहुंचाते।

  • रेगिस्तान की धूल में फॉस्फोरस, आयरन और अन्य खनिज मौजूद होते हैं।
  • ये पोषक तत्व दक्षिण अमेरिका के वर्षावनों की मिट्टी को उर्वर बनाने में मदद करते हैं।
  • समुद्री जीवों और प्लवकों (Plankton) के विकास में भी यह धूल महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • ऑस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध Great Barrier Reef जैसी कोरल रीफ्स को भी इससे लाभ मिलता है।

लेकिन इसके नुकसान भी कम नहीं

रेतीले तूफान कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं:

  • सांस लेने में परेशानी
  • आंखों और त्वचा में जलन
  • दमा और फेफड़ों की बीमारियां
  • हवाई यातायात में बाधा
  • फसलों और उपजाऊ मिट्टी का नुकसान
  • बैक्टीरिया, फंगस और वायरस के फैलने का खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि धूल के कणों के साथ सूक्ष्मजीव भी लंबी दूरी तय कर सकते हैं।

रेतीले तूफान बढ़ क्यों रहे हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियां इसके पीछे बड़ी वजह हैं।

मुख्य कारण:

  • जंगलों की कटाई
  • अत्यधिक खेती
  • भूमि का क्षरण
  • जल संसाधनों का गलत उपयोग
  • बढ़ता सूखा
  • तापमान में वृद्धि

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार वातावरण में मौजूद लगभग आधी धूल ऐसी भूमि से आती है जो मानवीय गतिविधियों के कारण खराब हो चुकी है।

मौसम पर भी पड़ता है असर

रेतीले तूफान केवल जमीन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि मौसम को भी प्रभावित करते हैं।

  • बादलों के बनने की प्रक्रिया बदल सकती है।
  • वर्षा कम हो सकती है।
  • सूर्य की रोशनी बाधित हो सकती है।
  • वैश्विक तापमान और चक्रवातों के पैटर्न पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

कैसे कम हो सकता है खतरा?

संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम सम्मेलन (UNCCD) के अनुसार इस समस्या से निपटने के लिए:

  • अधिक से अधिक वृक्षारोपण
  • मिट्टी संरक्षण
  • जल संरक्षण
  • टिकाऊ खेती
  • भूमि क्षरण रोकना

जैसे कदम जरूरी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूमि को सूखने और बंजर होने से रोका जाए तो रेतीले तूफानों की तीव्रता और संख्या दोनों को कम किया जा सकता है।

DESK REPORTER - CHANDAN KUMAR

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