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वाराणसी। महामना मदन मोहन मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर शनिवार को 'डिजिटल युग में हिन्दी पत्रकारिता' विषयक एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
नई पीढ़ी के पत्रकारों को जानकारी प्राप्त करने के लिए पहले की तरह लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं
डॉ. भगवान दास केंद्रीय पुस्तकालय के समिति कक्ष में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता के तीन प्रमुख सोपान के रूप में बाबू शिवप्रसाद गुप्त, भारतेंदु हरिश्चंद्र और महावीर प्रसाद द्विवेदी रहे हैं। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी के पत्रकारों को जानकारी प्राप्त करने के लिए पहले की तरह लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। डिजिटल माध्यमों के कारण सूचनाएं बहुत तेजी से उनके पास पहुंच जाती हैं। तकनीक ने पत्रकारों के कार्य को काफी आसान बना दिया है। प्रेम शुक्ल ने कहा कि आज हिन्दी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। पिछले 30 से 40 वर्षों में एक पूरी पीढ़ी ने हिंदी पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया है।
पत्रकारिता में विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण स्थान : प्रो. आनन्द कुमार त्यागी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने कहा कि आज के समय में पत्रकारिता में विश्वसनीयता का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। जिन छात्रों ने पत्रकारिता को अपने अध्ययन और करियर के रूप में चुना है, उनका क्षेत्र अत्यन्त संभावनाओं से भरा हुआ है। आने वाले पांच वर्षों में पत्रकारिता का महत्व और अधिक बढ़ेगा। भारत ने डिजिटल युग में स्वयं को अग्रणी देशों की श्रेणी में स्थापित किया है। प्रो. त्यागी ने कहा कि अनुभव और सीखने की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है। एक साधारण व्यक्ति भी अपने ज्ञान, परिश्रम और समर्पण से समाज में उत्कृष्ट कार्य कर सकता है।
डिजिटल युग में सत्यता की पुष्टि करना अनिवार्य : हंसराज विश्वकर्मा
सारस्वत अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि आज के डिजिटल युग में समाचार बहुत तेजी से हमारे सामने पहुंचे जाते हैं। हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत उदंत मार्तंड से हुई थी और आज की हिन्दी पत्रकारिता उसी मजबूत नींव पर विकसित होकर आगे बढ़ रही है। वर्तमान समय में समाचारों के अनेक डिजिटल माध्यम उपलब्ध हैं, जिनसे हमें तुरंत जानकारी मिल जाती है। कुछ माध्यम विश्वसनीय जानकारी देते हैं, जबकि कुछ स्थानों पर भ्रामक समाचार भी प्रसारित हो सकते हैं। इसलिए हमें उसकी सत्यता की पुष्टि करने के बाद ही उस पर विश्वास करना चाहिए।
खबर के पीछे की सच्चाई ढूंढना ही असली पत्रकारिता : प्रबल प्रताप सिंह
मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रका प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि आज का डिजिटल युग अवसर, संकट और चुनौती तीनों का संगम है। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया एक बड़ा अवसर है, क्योंकि आज सूचनाएँ बहुत तेजी से लोगों तक पहुँच रही हैं। पत्रकारिता के लिए यह एक संकट है, क्योंकि आज कोई भी व्यक्ति माइक लेकर स्वयं को पत्रकार कहने लगता है। भाषा पर संयम, उसकी शुद्धता तथा उसका सही प्रयोग ही किसी व्यक्ति को एक पेशेवर पत्रकार बनाता है। उन्होंने आगे कहा कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पत्रकार अपनी बात को प्रभावी, स्पष्ट और जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत कर सके। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने छात्रों को कहा कि जब भी वे पत्रकारिता के क्षेत्र में उतरें, तो केवल खबर तक सीमित न रहें, बल्कि खबर के पीछे छिपी सच्चाई को भी खोजने का प्रयास करें।
आधुनिक युग में तकनीक का बढ़ गया है महत्व-वरिष्ठ पत्रकार स्नेह रंजन
तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार स्नेह रंजन ने कहा कि आज के छात्रों को डिजिटल रूप से सक्षम होना चाहिए, क्योंकि आधुनिक युग में तकनीक का महत्व बढ़ गया है। साथ ही उन्होंने पुस्तकों के अध्ययन पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि छात्रों को महीने में कम से कम दो पुस्तकें पढ़नी चाहिए, जिससे उनकी समझ और ज्ञान में वृद्धि हो सके।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नागेन्द्र पाठक ने हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास पर विस्तार से डाला प्रकाश
विशिष्ठ वक्ता राहुल अवस्थी ने कहा कि आज के समय में शब्द, ज़ुबान और तकनीक अत्यंत उपयोगी हैं। टेक्स्ट ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम है, भाषा विचारों के आदान-प्रदान में सहायक होती है और टेक्नोलॉजी जीवन को सरल तथा प्रभावी बनाती है। उन्होंने बताया कि इन तीनों का संतुलित उपयोग छात्रों के व्यक्तित्व विकास, शिक्षा और भविष्य की सफलता के लिए आवश्यक है। वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नागेन्द्र पाठक ने हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इन लोगो की रही उपस्थिति
स्वागत निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. नागेन्द्र कुमार सिंह, विषय प्रवर्तन डॉ. मनोहर लाल, संचालन डॉ. प्रभा शंकर मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वैष्णवी शुक्ला व विजय कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. के.के. सिंह, डॉ. प्रमथेश पाण्डेय, डॉ. संतोष मिश्र, डॉ. जय प्रकाश श्रीवास्तव, अनिरुद्ध पाण्डेय, डॉ. शिवजी सिंह, डॉ. श्रीराम त्रिपाठी, डॉ. हरिकेश बहादुर सिंह, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. सरिता राव, डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, खुश्बू सिंह, आकाश सिंह, डॉली विश्वकर्मा, गुरु प्रकाश सिंह, करन सिंह, शिवम तिवारी, अतुल उपाध्याय, हर्षित तिवारी, शिवांगी, हर्षिता, स्तुति, पुलकित, साजिया, अनुष्का, जुली, जाह्नवी, हर्ष, समर, वंशिका, लुकमान, पुष्कर आदि उपस्थित रहे।
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