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वाराणसी। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित 12 दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स के चौथे दिन गुरुवार को प्रथम सत्र में प्रो. अंजलि शौकीन, शिक्षाशास्त्र विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय ने पाठ्यचर्या नियोजन, क्रियान्वयन, मूल्यांकन एवं पुनरीक्षण को सतत प्रक्रिया बताते हुए तकनीकी प्रगति, वैश्विक चुनौतियों तथा शिक्षार्थियों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यचर्या सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया। द्वितीय सत्र में प्रो. अरविंद कुमार पाण्डेय, पूर्व अध्यक्ष, शिक्षाशास्त्र विभाग, काशी विद्यापीठ ने कहा कि शिक्षा वह है जो हमें समर्थ बनती है। शिक्षा राष्ट्र के नागरिकों का जागरण है, शिक्षा जगाने का कार्य है, शिक्षा समर्थ पैदा करती है और यह निरंतर चलती रहती है।

विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करते हुए हमें ऐसे अनुभवात्मक वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता

तृतीय सत्र में काशी विद्यापीठ के शिक्षाशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करते हुए हमें ऐसे अनुभवात्मक वातावरण निर्मित करने की आवश्यकता है, जिसमें विद्यार्थी महसूस करने, समझने, विश्लेषण करने के साथ-साथ अपने समझ के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचने का प्रयास कर सकें तथा शिक्षकों को उनके निष्कर्ष को स्वीकार करते हुए उसमें उपयुक्त संशोधन करना चाहिए।चतुर्थ सत्र में मिजोरम विश्वविद्यालय के प्रो. मनोज कुमार वर्मा ने अनुसंधान, उसके घटकों, शोध करने की आवश्यकता, शोध पत्रों के प्रकाशन, शोध पत्रों की स्वीकृति और लेख संपादन से संबंधित उपकरणों के विषय में विस्तृत प्रकाश डाला। संचालन निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह, स्वागत डॉ. ध्यानेंद्र मिश्रा एवं तकनीकी सहयोग डॉ. विनय सिंह, अनुपम मिश्रा, दीपशिखा श्रीवास्तव, सारिका व सरस्वती ने किया।

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