khabarilaal news desk:-
वाराणसी। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में आयोजित 12 दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स के दूसरे दिन मंगलवार को प्रथम सत्र में प्रो. मनोज कुमार अग्रवाल अर्थशास्त्र विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय ने प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली पर प्रकाश डाला।
गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों के चरित्र, कौशल एवं व्यक्तित्व के समग्र विकास पर दिया जाता था बल
उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में विद्यार्थियों के चरित्र, कौशल एवं व्यक्तित्व के समग्र विकास पर बल दिया जाता था, जबकि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों का मूल्यांकन मुख्यतः अंकों एवं अंकपत्र के आधार पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्री या रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल, नैतिक मूल्यों, नवाचार एवं उद्यमिता का विकास कर उन्हें आत्मनिर्भर एवं समाजोपयोगी नागरिक बनाना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दिए गए संरचनात्मक परिवर्तनों के बारे में दी जानकारी
द्वितीय सत्र में प्रो. पतंजलि मिश्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अंतर्गत आयु-आधारित कक्षा संरचना, पाठ्यचर्या, शिक्षण-पद्धति, मूल्यांकन, शिक्षक, शैक्षिक प्रशासन, वित्तीय संसाधन, समानता एवं समावेशन तथा विद्यालयोत्तर शैक्षिक मार्गों के महत्व पर प्रकाश डाला। शिक्षा के संरचनात्मक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए स्वतंत्रता पूर्व तथा स्वतंत्रता पश्चात शिक्षा के क्षेत्र में आए हुए विभिन्न आयोगों तथा नीतियों के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में दिए गए संरचनात्मक परिवर्तनों के बारे में बताया। संचालन मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह, स्वागत डॉ. ध्यानेंद्र कुमार मिश्रा व दीपशिखा श्रीवास्तव, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रचना निगम एवं तकनीकी सहयोग डॉ. विनय सिंह, अनुपम मिश्रा, त्रियंबिका सिंह, सारिका व सरस्वती ने किया।
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