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वाराणसी। इतिहास विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'काशी की विरासत: काशी से मगहर तक, इतिहास स्मृति और लोक परम्परा' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन सोमवार को हुआ।

समावेशी विकास के लिए आवश्यक है कबीर के विचारों को किया जाए समाहित

श्रीसतगुरु कबीर प्राकट्य स्थल, लहरतारा में आयोजित संगोष्ठी के दूसरे दिन के तकनीकी सत्र में 25 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत हुए। समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. एम.पी.अहिरवार, प्राचीन भारतीय इतिहास विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने कहा कि समता मूलक समाज और समावेशी विकास के लिए आवश्यक है कि कबीर के विचारों को समाहित किया जाए।

वर्तमान में लैंगिक विभेद और मानवता का क्षरण जारी

मुख्य वक्ता प्रो. विपिन कुमार, हिंदी विभाग, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने कहा कि आज जहां वर्तमान में लैंगिक विभेद और मानवता का क्षरण जारी है, वहीं कई सौ वर्ष पूर्व कबीर ने मानवतापूर्ण व भेदभावरहित समाज की संकल्पना की थी। 

प्रो. आनंद शंकर चौधरी ने कबीर के मूल्यों पर डाला प्रकाश

विशिष्ट अतिथि प्रो. राजमुनी, विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, काशी विद्यापीठ ने कहा कि वर्तमान युग में भी कबीर के विचारों की अभिव्यक्ति दिखाई देती है, चाहे वह सामाजिक न्याय की बात हो या मानव कल्याण की। अध्यक्षीय उद्बोधन में इतिहास विभाग, काशी विद्यापीठ के अध्यक्ष प्रो. आनंद शंकर चौधरी ने कबीर के मूल्यों पर प्रकाश डाला।

डॉ. मनोज कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया दो दिवसीय संगोष्ठी का संपूर्ण रिपोर्ट

दो दिवसीय संगोष्ठी का संपूर्ण रिपोर्ट डॉ. मनोज कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया। स्वागत डॉ. रविंद्र कुमार गौतम एवं संचालन डॉ. अंजना वर्मा ने किया। इस अवसर पर प्रो. इंद्रवीर सिंह, डॉ. मिथिलेश कुमार, प्रो. सुरेंद्र राम, प्रो. विश्वनाथ, डॉ. अंशुमान सिंह, डॉ. कमलेश तिवारी, डॉ. विजय रंजन, डॉ. बृजेश शुक्ला, डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. अनामिका दुबे, डॉ. नंदिनी पटेल, डॉ. ऋषभ कुमार, डॉ. आनंद श्रीवास्तव, डॉ. विमल कुमार, डॉ. वीरेंद्र प्रताप, डॉ. अंजू, डॉ. प्रिया श्रीवास्तव, डॉ. सारिका गौतम, डॉ. संदीप, डॉ. प्रियंका सिंह आदि उपस्थित रहे।

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