khabarilaal news desk:-
वाराणसी। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कृषि विज्ञान केन्द्र, कल्लीपुर का निरीक्षण किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. रामबटुक सिंह भी उपस्थित रहे।
केन्द्र परिसर में व्यावसायिक (कमर्शियल) नर्सरी स्थापित करने पर विशेष बल
निरीक्षण के दौरान कुलपति ने केन्द्र के वैज्ञानिकों से कृषि प्रसार, अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं किसान हित में संचालित गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने केन्द्र परिसर में व्यावसायिक (कमर्शियल) नर्सरी स्थापित करने पर विशेष बल देते हुए निर्देश दिए कि किसानों को स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराकर बाहरी बाजारों पर उनकी निर्भरता कम की जाए। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र गुणवत्तापूर्ण पौध उत्पादन एवं कृषि नवाचार का उत्कृष्ट केन्द्र बने।
भ्रमण के दौरान कुलपति ने केन्द्र की समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) इकाई का किया निरीक्षण
भ्रमण के दौरान कुलपति ने केन्द्र की समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) इकाई का निरीक्षण किया तथा मत्स्य इकाई में स्वयं मछलियों को चारा खिलाया। उन्होंने नर्सरी, बकरी पालन एवं मुर्गी पालन इकाइयों का भी अवलोकन किया तथा इन उद्यमों को किसानों की आय बढ़ाने के प्रभावी मॉडल के रूप में विकसित करने पर बल दिया। इस अवसर पर "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान के अंतर्गत उन्होंने अम्रपाली आम का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत का संदेश दिया।
बागवानी आधारित कृषि को किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम
कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने पांच प्रगतिशील किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली लंगड़ा आम की पौध वितरित की तथा बागवानी आधारित कृषि को किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बताया।इसके उपरांत कुलपति ने उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरोद्धार योजना के अंतर्गत आयोजित किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीअन्न (मिलेट्स) पोषण सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं जलवायु अनुकूल कृषि का मजबूत आधार हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र, कल्लीपुर को शीघ्र ही प्रदेश के आदर्श कृषि विज्ञान केन्द्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
संभावित एल नीनो के प्रभावों के प्रति सचेत करते हुए मौसम आधारित कृषि अपनाने का आह्वान
उन्होंने किसानों को संभावित एल नीनो के प्रभावों के प्रति सचेत करते हुए मौसम आधारित कृषि अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कम अवधि एवं सूखा सहनशील फसल किस्मों का चयन करने, वर्षा की अनिश्चितता को देखते हुए श्रीअन्न, दलहन एवं तिलहनी जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने तथा धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि डीएसआर तकनीक से जल, श्रम एवं उत्पादन लागत में उल्लेखनीय बचत होती है और समय पर फसल स्थापित करने में सहायता मिलती है। साथ ही उन्होंने खेतों में वर्षा जल संरक्षण, मेड़बंदी, मल्चिंग, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों तथा समेकित कृषि प्रणाली (आईएफएस) को अपनाकर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों से कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के सतत संपर्क में रहकर नवीन वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की अपील की, जिससे कम लागत में अधिक उत्पादन एवं स्थायी आय सुनिश्चित की जा सके।
इस अवसर पर लगभग 40 किसान रहे उपस्थित
इस अवसर पर राष्ट्रीय बीज निगम के प्रबंधक श्री योगेंद्र यादव, कृषि विज्ञान केन्द्र के अध्यक्ष डॉ एन के सिंह एवं वैज्ञानिक श्रीप्रकाश, डॉ. मनीष पाण्डेय, डॉ. राहुल कुमार सिंह, डॉ. अमितेश कुमार सिंह, पूजा सिंह सहित राणा पियूष, अरविन्द गौतम, देवामणि विश्वकर्मा, अशोक, नागेंद्र, परमेन्द्र एवं लगभग 40 किसान उपस्थित रहे।
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