Khabarilaal news desk:-
वाराणसी।साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान चोलापुर पुलिस ने म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि टेलीग्राम के माध्यम से ऑनलाइन कमाई के लालच में एक युवक ने दो अन्य युवकों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका पूरा नियंत्रण अपने पास ले लिया था।
दो खातों में साइबर फ्रॉड की रकम का लेन-देन, जांच में खुला राज
इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़ी रकम के लेन-देन में किया जा रहा था। मामले में पुलिस ने तीन आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय द्वारा चिन्हित म्यूल खातों के सत्यापन अभियान के तहत साइबर नोडल उपनिरीक्षक राहुल यादव और कांस्टेबल विकास कुमार संदिग्ध खातों की जांच कर रहे थे। इसी क्रम में कैनरा बैंक के दो खातों की जांच की गई।
शुभम सिंह पुत्र रविंद्र सिंह निवासी दशवतपुर के कहने पर खुलवाया था खाता
जांच के दौरान खाताधारक आशीष कुमार गोंड पुत्र पप्पू कुमार गोंड निवासी दशवतपुर तथा सत्यम यादव पुत्र रामचंद्र सिंह यादव निवासी मोहाव-दशवतपुर से पूछताछ की गई। पूछताछ में आशीष कुमार गोंड ने बताया कि उसने अपना बैंक खाता स्वयं की जरूरत के लिए नहीं खुलवाया था, बल्कि शुभम सिंह पुत्र रविंद्र सिंह निवासी दशवतपुर के कहने पर खाता खुलवाया था। इसके बदले उसे पांच हजार रुपये दिए गए थे।
खाता खुलवाने के एवज में मिले थे ₹3000
उसने खाते का नेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड और एटीएम कार्ड भी शुभम सिंह को सौंप दिया था। वहीं सत्यम यादव ने भी पुलिस को बताया कि उसने शुभम सिंह के कहने पर बैंक खाता खुलवाया था और इसके एवज में उसे तीन हजार रुपये मिले थे। उसने भी अपने खाते की नेट बैंकिंग सुविधा और एटीएम कार्ड शुभम सिंह को दे दिया था। इतना ही नहीं, उसके पहचान पत्र पर एक नया सिम कार्ड भी लिया गया था, जिसका उपयोग शुभम सिंह द्वारा किया जा रहा था।
पुलिस पूछताछ में शुभम सिंह ने बताया ठगी का तरीका
पुलिस जब मुख्य आरोपित शुभम सिंह तक पहुंची तो पूछताछ में उसने बताया कि उसने टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन कमाई के तरीके सीखे थे। वहां उसे बताया गया था कि यदि किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते का उपयोग धनराशि के लेन-देन के लिए किया जाए तो कमीशन के रूप में लाभ कमाया जा सकता है। इसी लालच में उसने दोनों युवकों के खाते खुलवाकर उनका पूरा एक्सेस अपने पास रख लिया और विभिन्न स्थानों से धनराशि उन खातों में मंगवाता था। बदले में वह खाताधारकों को कुछ रकम देता था।
जांच के दौरान समन्वय और एनसीआरपी पोर्टल पर संबंधित खातों की खंगाली गई स्थिति
जांच के दौरान समन्वय और एनसीआरपी पोर्टल पर संबंधित खातों की स्थिति खंगाली गई। पुलिस के अनुसार एक खाते के विरुद्ध दो तथा दूसरे खाते के विरुद्ध एक शिकायत दर्ज पाई गई। पोर्टल पर उपलब्ध विवरण के अनुसार दोनों खातों के माध्यम से कुल 54,301 रुपये की साइबर ठगी की धनराशि का लेन-देन सामने आया है। प्रभारी निरीक्षक सधुबन राम गौतम ने बताया कि मामले में शुभम सिंह, आशीष कुमार गोंड और सत्यम यादव के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 319(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम 2008 की धारा 66सी और 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
किसी के बहकावे में आकर ना दे अपने बैंक खाते की विस्तृत जानकारी
मामले की विवेचना की जा रही है और साइबर ठगी से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के लालच, कमीशन या ऑनलाइन कमाई के झांसे में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी या नेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें। ऐसा करना साइबर अपराधियों की मदद करना माना जा सकता है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
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