लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख Mayawati ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान महिला आरक्षण, सामाजिक न्याय और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर कई महत्वपूर्ण बयान दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा संसद का 3 दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है, लेकिन महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर अभी भी ठोस अमल की कमी दिखाई देती है।
SC-ST, OBC महिलाओं के लिए अलग कोटा की मांग, केंद्र सरकार की नीयत पर भी सवाल
मायावती ने कहा कि महिला सशक्तिकरण को लेकर बड़ी-बड़ी बातें तो की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सही नीयत और मजबूत इच्छाशक्ति का अभाव साफ नजर आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि SC, ST और OBC वर्गों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
पिछड़े और वंचित वर्गों की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित न किया जाए
बसपा प्रमुख ने महिला आरक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का स्वागत करते हुए कहा कि संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह तब तक पूर्ण नहीं माना जा सकता जब तक इसमें पिछड़े और वंचित वर्गों की महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित न किया जाए।
SC-ST और OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की आवश्यकता
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शोषित और पिछड़े वर्ग की महिलाएं ही इस आरक्षण की वास्तविक हकदार हैं। मायावती ने SC-ST और OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बिना इसके महिला आरक्षण का लाभ समान रूप से नहीं मिल पाएगा।
मायावती ने की मंडल आयोग की तर्ज पर व्यवस्था लागू करने की मांग
मायावती ने मंडल आयोग की तर्ज पर व्यवस्था लागू करने की मांग करते हुए कहा कि जिस प्रकार OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, उसी प्रकार महिलाओं के लिए भी वर्ग आधारित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो महिला आरक्षण का पूरा लाभ केवल सीमित वर्ग तक ही सिमट कर रह जाएगा।उन्होंने सवर्ण महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की अपनी पुरानी मांग को भी दोहराया और कहा कि राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के कारण इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
राजनीतिक दलों से अपील
मायावती ने महिला सुरक्षा और सम्मान को आरक्षण से जोड़ते हुए कहा कि जब तक सही नीति और संतुलित व्यवस्था नहीं बनाई जाएगी, तब तक महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के कमजोर वर्गों के हित में निर्णय लें।
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