khabarilaal news desk:-
वाराणसी। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित 12 दिवसीय पुनर्श्चर्या कार्यक्रम 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शैक्षिक सुधार' का शुभारंभ सोमवार को हुआ।
कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अंतर्गत शिक्षा में हो रहे शैक्षणिक एवं शिक्षण-पद्धति संबंधी परिवर्तनों पर डाला प्रकाश
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनन्द कुमार त्यागी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अंतर्गत शिक्षा में हो रहे शैक्षणिक एवं शिक्षण-पद्धति संबंधी परिवर्तनों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान, बहु-प्रवेश एवं बहु-निर्गम, क्रेडिट प्रणाली तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े पाठ्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने व्यावसायिक शिक्षा, समान एवं समावेशी शिक्षा, विषयों के बीच लचीलेपन तथा प्रभावी शैक्षिक प्रशासन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराना है।
वर्तमान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है : प्रो. रजनीश शुक्ला
मुख्य अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का उद्देश्य शिक्षा को जमीनी स्तर तक पहुंचाकर विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, इसलिए विद्यार्थियों को इसके साथ समालोचनात्मक एवं सृजनात्मक चिंतन विकसित करना चाहिए। साथ ही उन्होंने आजीवन अधिगम, स्थानीय संदर्भों से जुड़ाव तथा वैश्विक दृष्टिकोण को अपनाने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने बताया की भौतिक एवं सांस्कृतिक निर्भरता से हम लोग विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित 12 दिवसीय पुनर्श्चर्या कार्यक्रम 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शैक्षिक सुधार' का शुभारंभ
प्रथम सत्र के मुख्य वक्ता प्रो. भुवन चन्द्र महापात्रा, निदेशक, मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा और अनुसंधान केंद्र, केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजस्थान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के अंतर्गत क्रेडिट आधारित चयन प्रणाली एवं ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत व्याख्या की। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था विद्यार्थियों को अधिगम में लचीलापन, गुणवत्तापूर्ण एवं समतामूलक शिक्षा तथा विषय चयन की स्वतंत्रता प्रदान करती है। दूसरे सत्र की मुख्य वक्ता प्रो. मिनाक्षी बिस्वाल, निदेशक, श्री सत्य साईं इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन एक्सीलेंस कलबुर्गी कर्नाटक ने भारतीय ज्ञान परम्परा के महत्व पूर्ण बिन्दुओं को रेखांकित किया। स्वागत मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के निदेशक प्रो. रमाकान्त सिंह एवं संचालन सह समन्वयक डॉ. ध्यानेंद्र कुमार मिश्रा ने किया। इस अवसर पर डॉ. विनय सिंह,अनुपम मिश्रा, दीपशिखा श्रीवास्तव, त्रियंबिका सिंह, सारिका, सरस्वती आदि उपस्थित रहे।
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