khabarilaal news desk:-
महानगर कांग्रेस कमेटी वाराणसी के अध्यक्ष राघवेन्द्र चौबे ने वाराणसी पुलिस कमिश्नर/जिला प्रशासन एवं रेलवे प्रशासन से मांग की है कि मुहर्रम के दौरान निकाले जाने वाले ऐतिहासिक एवं कदीमी ताजियों को उनकी परंपरागत राह से सरैया स्थित कर्बला तक पहुंचाने हेतु तेलियाना रेलवे फाटक को मानवीय दृष्टिकोण के तहत विशेष व्यवस्था कर खोला जाए।
वाराणसी की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी सौहार्द और धार्मिक परंपराओं का सदियों पुराना इतिहास
श्री चौबे ने कहा कि वाराणसी की गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी सौहार्द और धार्मिक परंपराओं का इतिहास सदियों पुराना है। काजी सादुल्लापुरा, रांगे वाली तथा अन्य कदीमी ताजियों का जुलूस लगभग दो सौ वर्षों से अधिक समय से अलईपुरा, तेलियाना फाटक होते हुए सरैया कर्बला तक जाता रहा है। अंडरपास निर्माण के बाद तेलियाना रेलवे फाटक बंद होने से यह ऐतिहासिक परंपरा प्रभावित हुई है।
ऊंचाई अधिक होने के कारण बड़े एवं ऐतिहासिक ताजियों को ले जाना जोखिमपूर्ण
राघवेन्द्र चौबे ने कहा कि वर्तमान में उपलब्ध वैकल्पिक मार्ग कज्जाकपुरा फ्लाईओवर से होकर गुजरता है, जहां ऊंचाई अधिक होने के कारण बड़े एवं ऐतिहासिक ताजियों को ले जाना जोखिमपूर्ण है। इसके अतिरिक्त ताजियादारों एवं अंजुमनों द्वारा यह भी बताया गया है कि उक्त मार्ग धार्मिक मान्यताओं एवं अकीदत के अनुरूप नहीं माना जाता, क्योंकि कर्बला क्षेत्र के ऊपर से ताजिया ले जाने पर आपत्ति व्यक्त की जा रही है।
शहर के ताजियादार, अंजुमनें और मुहर्रम इंतजामिया समितियां कई माह से प्रशासन से कर रही अनुरोध
उन्होंने कहा कि शहर के ताजियादार, अंजुमनें और मुहर्रम इंतजामिया समितियां कई माह से प्रशासन से अनुरोध कर रही हैं कि वर्ष में केवल एक बार निकलने वाले इन कदीमी जुलूसों के लिए रेलवे प्रशासन से समन्वय स्थापित कर तेलियाना रेलवे फाटक को निर्धारित समय के लिए खोला जाए,ताकि कोई नयी परंपरा की शुरुवात न हो व सदियों पुरानी परंपरा, धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सौहार्द का सम्मान हो सके।
महानगर कांग्रेस कमेटी वाराणसी का प्रशासन से आग्रह
महानगर कांग्रेस कमेटी वाराणसी प्रशासन से आग्रह करती है कि सभी पक्षों से संवाद स्थापित कर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाए तथा मुहर्रम के अवसर पर कदीमी ताजियों को उनकी पारंपरिक राह से सरैया कर्बला तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे शहर की ऐतिहासिक विरासत और गंगा-जमुनी संस्कृति अक्षुण्ण बना रहे।
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