KhabariLaal News Desk :
दुनियाभर के खगोल प्रेमियों के लिए अगस्त 2026 खास होने वाला है। 27 और 28 अगस्त की रात आसमान में एक बेहद दुर्लभ और गहरा आंशिक चंद्रग्रहण (Lunar Eclipse) दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और अंटार्कटिका समेत कई देशों में देखी जा सकेगी। हालांकि भारत और उसके पड़ोसी देशों में यह चंद्रग्रहण दिखाई नहीं देगा।
क्या होता है चंद्रग्रहण?
चंद्रग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। इस दौरान चंद्रमा का कुछ हिस्सा या पूरा हिस्सा अंधेरे में ढक जाता है।
इस बार होने वाला ग्रहण आंशिक होगा, लेकिन बेहद गहरा रहेगा क्योंकि चंद्रमा का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया यानी ‘अम्ब्रा’ में प्रवेश करेगा।
कब शुरू होगा ग्रहण?
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार, यह चंद्रग्रहण 28 अगस्त 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह करीब 6:53 बजे (1:23 UTC) शुरू होगा। ग्रहण अपने चरम पर करीब 10:11 बजे UTC पहुंचेगा, जब चंद्रमा का अधिकांश हिस्सा पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा।
कैसा दिखेगा आसमान?
ग्रहण के दौरान चंद्रमा पर लालिमा लिए अद्भुत चमक दिखाई देगी। चंद्रमा के किनारे पर हल्की लाल रोशनी और सफेद चमकीला भाग एक शानदार दृश्य पेश करेगा। यही वजह है कि इसे खगोल विज्ञान की सबसे खूबसूरत घटनाओं में गिना जा रहा है।
कितनी देर तक रहेगा ग्रहण?
यह चंद्रग्रहण कुल 339 मिनट तक चलेगा, जबकि चंद्रमा लगभग 199 मिनट तक पृथ्वी की गहरी छाया में रहेगा। यह ग्रहण सारोस 138 श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है, जो खगोलीय घटनाओं की एक विशेष श्रृंखला है।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा?
चंद्रग्रहण केवल उन्हीं क्षेत्रों में दिखाई देता है जहां उस समय रात होती है। अगस्त 2026 के इस ग्रहण के दौरान भारत में दिन का समय रहेगा, इसलिए यहां के लोग इस अद्भुत खगोलीय नजारे को नहीं देख पाएंगे।
खगोल प्रेमियों के लिए खास मौका
वैज्ञानिकों का मानना है कि इतना गहरा आंशिक चंद्रग्रहण काफी दुर्लभ होता है। इसलिए जिन देशों में यह दिखाई देगा, वहां खगोल प्रेमियों और फोटोग्राफर्स के लिए यह एक शानदार अवसर होगा।
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