Khabarilaal News Desk :
Google की पैरेंट कंपनी Alphabet ने एक अनोखे और चर्चित प्रोजेक्ट के तहत लैब में 3.2 करोड़ विशेष मच्छरों को तैयार किया है। कंपनी अब इन्हें अमेरिका के कुछ इलाकों में छोड़ने के लिए सरकारी अनुमति का इंतजार कर रही है। इस पहल का उद्देश्य मच्छरों से फैलने वाली खतरनाक बीमारियों जैसे West Nile Virus और St. Louis Encephalitis को नियंत्रित करना है।
क्या हैं ये ‘स्पेशल’ मच्छर?
Alphabet के Debug Project के तहत तैयार किए गए ये सभी मच्छर नर (Male) हैं। खास बात यह है कि नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते, इसलिए इनसे सीधे तौर पर लोगों को कोई खतरा नहीं माना जा रहा है।
कंपनी ने इन मच्छरों को Wolbachia नामक प्राकृतिक बैक्टीरिया से संक्रमित किया है, जो मच्छरों की प्रजनन प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
आबादी के बीच छोड़ने का मकसद क्या है?
जब ये लैब में तैयार किए गए नर मच्छर प्राकृतिक वातावरण में मौजूद मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करेंगे, तो उनके अंडे विकसित नहीं हो पाएंगे।
इससे नई पीढ़ी के मच्छरों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगेगी और समय के साथ बीमारी फैलाने वाले मच्छरों की आबादी घट सकती है।
AI और रोबोट्स संभाल रहे पूरा ऑपरेशन
Alphabet का यह प्रोजेक्ट अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित है।
लैब में करोड़ों मच्छरों को पालने, उनकी निगरानी करने और उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटने का काम ऑटोमेटेड रोबोट्स द्वारा किया जाता है।
AI आधारित सिस्टम नर और मादा मच्छरों की पहचान कर उन्हें अलग करता है ताकि केवल नर मच्छरों को ही रिलीज किया जा सके।
विशेष गाड़ियों से होगी रिलीज
मच्छरों को सुरक्षित तरीके से तय इलाकों तक पहुंचाने के लिए कंपनी विशेष मोबाइल प्लेटफॉर्म्स और वाहनों का उपयोग करेगी।
इन वाहनों के जरिए अलग-अलग चरणों में मच्छरों को छोड़ा जाएगा ताकि उनके प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके।
2016 से चल रहा है प्रोजेक्ट
Alphabet ने इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2016 में की थी। कंपनी पहले भी सीमित स्तर पर ऐसे मच्छरों को वातावरण में छोड़ चुकी है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने का दावा किया गया था।
अब बड़े पैमाने पर इस मॉडल को लागू करने की तैयारी की जा रही है।
सरकार के फैसले का इंतजार
फिलहाल अमेरिकी सरकारी एजेंसियां कंपनी के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही हैं। इस विषय पर आम लोगों से भी सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही मच्छरों को आबादी वाले क्षेत्रों में छोड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी।
दो साल तक चलेगा ट्रायल
Alphabet की योजना के अनुसार इस परियोजना का ट्रायल करीब दो वर्षों तक चलेगा। इस दौरान अलग-अलग चरणों में मच्छरों को छोड़ा जाएगा और उनके प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।
बीमारी रोकने की नई तकनीक
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण जैविक समाधान साबित हो सकता है।
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