khabarilaal news desk:-
वाराणसी :-भारतीय जनता पार्टी के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती संस्मरण पखवाड़ा के अंतर्गत सोमवार को चौकाघाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में आयोजित छात्र सम्मेलन में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 केवल एक नई शैक्षणिक व्यवस्था नहीं, बल्कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दूरदर्शी शिक्षा नीति और राष्ट्रवादी चिंतन का आधुनिक स्वरूप है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, कला, संस्कृति और समग्र विकास को शिक्षा का हिस्सा बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने छात्रों से डॉ. मुखर्जी के जीवन से राष्ट्रप्रेम, देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
भाजपा के छात्र सम्मेलन में प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह बोले मातृभाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक शिक्षा डॉ. मुखर्जी की सोच का विस्तार

नीरज सिंह ने कहा कि वर्ष 1937 में मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बनने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अंग्रेजी के वर्चस्व को चुनौती देते हुए बांग्ला को शिक्षा का माध्यम बनाया था। उनके कार्यकाल में ही गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को अपनी मातृभाषा बांग्ला में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का त्रिभाषा सूत्र, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने की व्यवस्था उसी सोच का विस्तार है। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा, कला, तकनीकी शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों को पाठ्यक्रम में शामिल कर शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखने की डॉ. मुखर्जी की अवधारणा को साकार किया गया है।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. मुखर्जी के संकल्प को किया पूरा

प्रदेश उपाध्यक्ष ने डॉ. मुखर्जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता के प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता सर आशुतोष मुखर्जी देश के प्रख्यात शिक्षाविद थे। डॉ. मुखर्जी ने 1917 में मैट्रिक, 1921 में बीए तथा 1923 में लॉ की शिक्षा पूरी करने के बाद इंग्लैंड जाकर बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त की और 1926 में स्वदेश लौटे। अल्पायु में ही उन्होंने शिक्षा जगत में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करते हुए देश के सबसे कम उम्र के विश्वविद्यालय कुलपति बनने का गौरव प्राप्त किया।
डॉ. मुखर्जी ने राजनीति में प्रवेश कर राष्ट्रहित को रखा सर्वोपरि

उन्होंने कहा कि बाद में डॉ. मुखर्जी ने राजनीति में प्रवेश कर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। बंगाल में मुस्लिम लीग की सांप्रदायिक राजनीति और विभाजनकारी प्रयासों का उन्होंने दृढ़ता से विरोध किया तथा बंगाल के विभाजन के प्रयासों को विफल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वतंत्र भारत की पहली केंद्र सरकार में पंडित जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में उद्योग मंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रहित के मुद्दों पर स्पष्ट विचार रखे, लेकिन वैचारिक मतभेदों के चलते 6 अप्रैल 1950 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वर्ष 1951 में उन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की।
वर्ष 1953 में बिना परमिट जम्मू-कश्मीर जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद किया गया,
नीरज सिंह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी जम्मू-कश्मीर को भारत का पूर्ण और अभिन्न अंग बनाने के पक्षधर थे। उन्होंने संसद के भीतर और बाहर अनुच्छेद-370 समाप्त करने की जोरदार पैरवी की। वर्ष 1952 में जम्मू की विशाल रैली में उन्होंने घोषणा की थी कि या तो जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान लागू कराएंगे या इसके लिए अपना जीवन बलिदान कर देंगे। वर्ष 1953 में बिना परमिट जम्मू-कश्मीर जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर नजरबंद किया गया, जहां 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनका निधन हो गया। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद-370 समाप्त कर डॉ. मुखर्जी के ऐतिहासिक संकल्प को पूरा किया और राष्ट्र की एकता को नई मजबूती दी।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती संस्मरण पखवाड़ा के तहत आयोजित कार्यक्रम में क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया और जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल का हुआ सम्मान

कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त भाजपा काशी क्षेत्र अध्यक्ष अशोक चौरसिया तथा जिलाध्यक्ष रामसकल पटेल का अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ। इसके बाद वंदे मातरम् का सामूहिक गान हुआ।स्वागत भाषण महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने दिया, जबकि संचालन भाजपा युवा मोर्चा महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल ने किया। अंत में भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष अमन सोनकर ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
सम्मेलन में हजारों छात्र-छात्राएं एवं पार्टी कार्यकर्ता रहे उपस्थित
सम्मेलन में अशोक चौरसिया, प्रदीप अग्रहरि, रामसकल पटेल, महापौर अशोक तिवारी, विधायक सौरभ श्रीवास्तव, विधायक टी. राम, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र राय, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी नवरतन राठी, सुजीत सिंह टीका, संतोष सोलापुरकर, रजत जायसवाल, अमन सोनकर, अनिल श्रीवास्तव, सयुश अग्रवाल, विनोद गुप्ता, नवीन कपूर, जगदीश त्रिपाठी, संजय सोनकर, आत्मा विश्वेश्वर, चंद्रशेखर उपाध्याय, डॉ. रचना अग्रवाल, साधना वेदांती, कुसुम पटेल, अखिलेंद्र सिंह सन्नी, ओम मिश्रा, नीरज जायसवाल, रणजय सिंह राज, संदीप सिंह मिंटू, उत्तम ओझा, अमित राय, पंकज चतुर्वेदी और कुशाग्र श्रीवास्तव सहित हजारों छात्र-छात्राएं एवं पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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