KHABARILAAL NEWS DESK :

वाराणसी। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) केवल देश की अग्रणी रेल इंजन निर्माण इकाई ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में भी एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है। वर्ष 1956 में स्थापित और 1961 में उत्पादन शुरू करने वाले बरेका ने अब तक 11 हजार से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण कर भारतीय रेल की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2020 में इसका पुनर्नामकरण बनारस रेल इंजन कारखाना के रूप में किया गया और आज यह देश की सबसे बड़ी मल्टी गेज एवं मल्टी ट्रैक्शन लोकोमोटिव निर्माण इकाइयों में शामिल है।

इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव निर्माण से घटा कार्बन फुटप्रिंट

भारतीय रेलवे के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बरेका ने वर्ष 2017 से ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का निर्माण शुरू किया। वर्तमान में यहां मुख्य रूप से उच्च अश्व शक्ति वाले इलेक्ट्रिक इंजन बनाए जा रहे हैं, जो भारत के साथ-साथ बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, तंजानिया, सूडान, सेनेगल और मलेशिया जैसे देशों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

गंगा संरक्षण में निभा रहा अहम भूमिका

पर्यावरणीय जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए बरेका ने 1980 के दशक में ही 12 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और 3 एमएलडी क्षमता का औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र (IETP) स्थापित किया था। बरेका से निकलने वाला कोई भी सीवेज गंगा नदी में नहीं छोड़ा जाता।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में एसटीपी द्वारा 1479 मिलियन लीटर पानी का उपचार किया गया। वहीं औद्योगिक अपशिष्ट उपचार संयंत्र ने मिश्रित पेट्रोलियम तेल और लुब्रिकेंट को सफलतापूर्वक अलग कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया। सभी मानकों की निगरानी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ऑनलाइन की जाती है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में मिला ‘जल प्रहरी अवार्ड’

जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बरेका ने इस वर्ष 41 नए गहरे रिचार्ज कुओं का निर्माण कराया, जिससे कुल संख्या बढ़कर 71 हो गई है। इससे भूजल स्तर सुधारने के साथ-साथ जलभराव की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

इसी उत्कृष्ट कार्य के लिए बरेका को प्रतिष्ठित "जल प्रहरी अवार्ड" से सम्मानित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जल संरक्षण अभियान के तहत कंचनपुर कॉलोनी में 311 लाख लीटर क्षमता वाला विशाल जल संचयन तालाब भी बनाया गया है।

सौर ऊर्जा से बचा हजारों टन कार्बन उत्सर्जन

ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए बरेका ने 3.87 मेगावाट क्षमता के ग्रिड-संलग्न सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इन संयंत्रों से 41.87 लाख यूनिट हरित ऊर्जा का उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 3433.89 टन कार्बन उत्सर्जन कम हुआ।

बरेका की कुल ऊर्जा खपत में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 19.87 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो हरित ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

SCADA तकनीक से बढ़ी ऊर्जा दक्षता

ऊर्जा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए बरेका देश की पहली ऐसी उत्पादन इकाई बनी जहां SCADA प्रणाली लागू की गई। इस तकनीक के उपयोग से डीजल जनरेटर की खपत में वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 45.81 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।

हरियाली से घिरा बरेका परिसर

बरेका परिसर में वर्तमान समय में एक लाख से अधिक पेड़ मौजूद हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 4000 नए पौधे लगाए गए। "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के तहत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है।

लगातार हरित विकास के प्रयासों का परिणाम है कि बरेका का लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र हरित आवरण से आच्छादित है। विशेषज्ञों के अनुसार परिसर का तापमान बाहरी क्षेत्रों की तुलना में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक कम महसूस होता है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर रहा बरेका

पर्यावरण और गुणवत्ता प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए बरेका को ISO 14001:2015, ISO 9001, ISO 50001, ISO 45001, ISO 22163 तथा IRIS Silver Level जैसे कई अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन प्राप्त हैं।

इसके अलावा बरेका चिकित्सालय से निकलने वाले बायो-मेडिकल कचरे का निस्तारण भी आधुनिक तकनीक और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के अनुरूप किया जा रहा है।

स्वच्छ भारत-हरित भारत के संकल्प को दे रहा मजबूती

स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन, हरित ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में लगातार किए जा रहे प्रयासों के माध्यम से बरेका न केवल भारतीय रेलवे की औद्योगिक शक्ति को मजबूत कर रहा है, बल्कि "स्वच्छ भारत-हरित भारत" के राष्ट्रीय अभियान को भी नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।

DESK REPORTER – CHANDAN KUMAR

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