Khabarilaal News Desk :

Indian Institute of Technology (BHU) Varanasi और Parul University के शोधकर्ताओं ने औद्योगिक अपशिष्ट जल से अत्यंत विषैली और कैंसरकारी मैलाकाइट ग्रीन डाई को हटाने के लिए एक नई हरित (Green) तकनीक विकसित की है। इसे जल प्रदूषण के खिलाफ एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है।

संतरे के छिलके से तैयार हुआ खास नैनोकॉम्पोजिट

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक में संतरे के छिलके (Citrus sinensis) के अर्क को प्राकृतिक रिड्यूसिंग एजेंट के रूप में इस्तेमाल किया है। इससे तैयार किया गया SnO₂/PANI-Co-PPy Nanocomposite पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल और अपशिष्ट-आधारित तकनीक है।

30 मिनट में 97% जहरीली डाई हटाने की क्षमता

नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ 30 मिनट में 97.06% मैलाकाइट ग्रीन डाई को हटाने में सक्षम है। इसकी 1250 mg g⁻¹ की उच्च एडसॉर्प्शन क्षमता इसे बेहद प्रभावी बनाती है।

महंगे उपकरण या खतरनाक रसायनों की जरूरत नहीं

इस तकनीक के लिए किसी महंगे उपकरण, खतरनाक रसायन या विशेष प्रशिक्षित श्रम की आवश्यकता नहीं है। यही वजह है कि इसे औद्योगिक स्तर पर आसानी से लागू किया जा सकता है।

प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध

यह शोध Royal Society of Chemistry की प्रतिष्ठित जर्नल RSC Advances में “Adsorption of Malachite Green from Aqueous Solutions Using a Novel SnO₂/PANI-Co-PPy Nanocomposite” शीर्षक से प्रकाशित हुआ है।

IIT (BHU) निदेशक ने दी बधाई

Amit Patra ने इस उपलब्धि पर शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह शोध सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भविष्य में होगा औद्योगिक परीक्षण

शोधकर्ताओं ने बताया कि अब इस तकनीक के रीजेनेरेशन (Regeneration) और वास्तविक औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रणालियों में परीक्षण पर काम किया जाएगा।

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