वाराणसी | परशुराम जयंती पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने भगवान परशुराम के जीवन को धर्म, शौर्य और नैतिक नेतृत्व का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नैतिकता, अनुशासन और पर्यावरण संतुलन की आवश्यकता बढ़ गई है। युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाकर समाज निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

भगवान परशुराम के जीवन को धर्म, शौर्य और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम बताया

वैशाख शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम जयंती देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने अपना संदेश जारी करते हुए भगवान परशुराम के जीवन को धर्म, शौर्य और नैतिक नेतृत्व का अद्भुत संगम बताया।उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम, जिन्हें भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है, ज्ञान और शक्ति के अद्वितीय समन्वय के प्रतीक हैं। महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र परशुराम ने तप, त्याग, संयम और पराक्रम के माध्यम से धर्म की स्थापना का कार्य किया।

सदैव न्याय और लोककल्याण के लिए होना चाहिए शक्ति का उपयोग

कुलपति ने कहा कि कार्तवीर्य अर्जुन जैसे अत्याचारी शासकों के विरुद्ध उनका संघर्ष यह संदेश देता है कि शक्ति का उपयोग  सदैव न्याय और लोककल्याण के लिए होना चाहिए  वर्तमान समय में जब समाज नैतिक चुनौतियों और मूल्यों के संकट से जूझ रहा है, तब भगवान परशुराम के आदर्श अत्यंत प्रासंगिक हैं।उन्होंने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, आत्मानुशासन और नैतिक मूल्यों का समावेश भी आवश्यक है। भगवान परशुराम ‘ब्राह्मतेज’ और ‘क्षात्रतेज’ के संतुलन के प्रतीक हैं, जो बौद्धिक क्षमता और साहस दोनों के महत्व को दर्शाते हैं।

परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अन्याय और अधर्म के विरुद्ध सजग

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे ग परशुराम के जीवन से प्रेरणा लेकर अन्याय और अधर्म के विरुद्ध सजग रहें तथा अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान बनें। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में अनुशासन, आत्मसंयम और नैतिकता का महत्व और अधिक बढ़ गया है।पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम का जीवन प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व का संदेश देता है, जो वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 हमें यह संकल्प लेने का अवसर देती है परशुराम जयंती

अंत में उन्होंने कहा कि परशुराम जयंती हमें यह संकल्प लेने का अवसर देती है कि हम अपने जीवन में धर्म, न्याय और करुणा के सिद्धांतों को अपनाएं। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी और इसी मार्ग पर चलकर एक सशक्त, समरस और नैतिक समाज का निर्माण किया जा सकता है।

Link Copied to Clipboard!

Comments (0)

2 + 10 = ?
No comments yet. Be the first to share your thoughts!