Khabarilaal News Desk :
रूस के नए ट्विन-सीट स्टील्थ फाइटर Su-57D को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। इस विमान की पहली टेस्ट फ्लाइट उड़ाने वाले सुखोई डिजाइन ब्यूरो के चीफ टेस्ट पायलट सर्गेई बोगदान ने बताया कि यह सिर्फ लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि हवा में उड़ता हुआ कमांड सेंटर भी बन सकता है।
दूसरे पायलट की होगी खास भूमिका
सर्गेई बोगदान के मुताबिक, Su-57D में मौजूद दूसरा पायलट बड़े सैन्य अभियानों के दौरान फैसले लेने, कम्युनिकेशन बनाए रखने और मिशन को गाइड करने का काम कर सकता है। कम्युनिकेशन बाधित होने पर भी यह विमान ऑपरेशन जारी रखने में मददगार होगा।
हवा में उड़ता कमांड पोस्ट बन सकता है Su-57D
रूसी टेस्ट पायलट का कहना है कि अनुभवी अधिकारी के साथ यह विमान युद्ध क्षेत्र के करीब रहकर पूरी टीम को निर्देश दे सकता है। इससे तेजी से बदलती परिस्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया देना आसान हो जाएगा।
भारत के लिए क्यों माना जा रहा अहम?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी इलाकों या हाई-रिस्क मिशन में यह विमान दुश्मन के रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन नेटवर्क के खिलाफ बड़ी भूमिका निभा सकता है। खासकर चीन सीमा के आसपास जटिल एयर ऑपरेशन में इसकी उपयोगिता पर चर्चा हो रही है।
ड्रोन और AI के साथ हो सकता है इंटीग्रेशन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Su-57D भविष्य में लॉयल विंगमैन ड्रोन और एडवांस AI सिस्टम के साथ मिलकर काम कर सकता है। इससे एक पायलट सिर्फ विमान नहीं, बल्कि पूरी ड्रोन टीम को नियंत्रित कर सकेगा।
भारत और रूस का पुराना ट्विन-सीट फाइटर प्लान
भारत और रूस ने 2010 के दशक में FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। उस दौरान भारतीय वायुसेना ने ट्विन-सीट स्टील्थ फाइटर में रुचि दिखाई थी। हालांकि बाद में तकनीकी मतभेदों के चलते भारत इस प्रोजेक्ट से अलग हो गया था।
क्या बदल सकता है भविष्य?
अब Su-57D के फ्लाइट टेस्ट के बाद यह सवाल फिर उठ रहा है कि क्या भारत भविष्य में इस तरह के ट्विन-सीट स्टील्थ फाइटर प्लेटफॉर्म में दोबारा रुचि दिखाएगा। हालांकि इस पर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
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