Khabarilaal News Desk :
गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान ने अमेरिका में अपनी राजनीतिक और कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पाकिस्तान ने वॉशिंगटन स्थित एक प्रमुख लॉबिंग फर्म के साथ दो वर्षों का 1.2 मिलियन डॉलर (करीब 10 करोड़ रुपये) का समझौता किया है। इस पहल का उद्देश्य अमेरिकी प्रशासन और कांग्रेस में अपनी पहुंच बढ़ाना तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को बेहतर बनाना बताया जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन में बढ़ाना चाहता है प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार यह समझौता 1 मई 2026 से प्रभावी हुआ है। अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रिजवान सईद शेख ने वॉशिंगटन स्थित लॉबिंग फर्म एर्विन ग्रेव्स स्ट्रेटेजी ग्रुप LLC के साथ इस करार पर हस्ताक्षर किए हैं।
समझौते के तहत फर्म को प्रति माह 50,000 डॉलर का भुगतान किया जाएगा। दो वर्षों में कुल लागत 1.2 मिलियन डॉलर तक पहुंचेगी।
पाकिस्तान की छवि सुधारने का जिम्मा
इस लॉबिंग अभियान का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में पाकिस्तान को एक भरोसेमंद व्यापारिक और आतंकवाद-रोधी सहयोगी के रूप में प्रस्तुत करना है। इसके साथ ही पाकिस्तान अपनी उस नकारात्मक छवि से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा है जो वर्षों से आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दों के कारण बनी हुई है।
व्हाइट हाउस और कांग्रेस तक पहुंच बनाने की रणनीति
लॉबिंग फर्म को व्हाइट हाउस, पेंटागन और अमेरिकी कांग्रेस के प्रभावशाली सदस्यों के साथ बैठकों का आयोजन करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा रक्षा और विदेश नीति से जुड़ी समितियों तक पाकिस्तान की बात पहुंचाने का भी काम किया जाएगा।
फर्म अमेरिकी सांसदों, नीति निर्माताओं और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच बंद कमरे की बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का समन्वय भी करेगी।
‘मेजर नॉन-नाटो एलाय’ दर्जा बचाने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अपने "प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी" (Major Non-NATO Ally) दर्जे को बनाए रखने के लिए भी सक्रिय प्रयास कर रहा है। इसके तहत अफगानिस्तान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों और आतंकवाद-रोधी अभियानों में अपनी भूमिका को प्रमुखता से पेश किया जाएगा।
आर्थिक संकट के बीच उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि जब पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट, महंगाई और विदेशी कर्ज के दबाव से जूझ रहा है, तब करोड़ों रुपये विदेशी लॉबिंग पर खर्च करना सवाल खड़े करता है। आलोचकों का कहना है कि सरकार को महंगी जनसंपर्क रणनीतियों के बजाय आर्थिक सुधारों और घरेलू चुनौतियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की कोशिश
विश्लेषकों के अनुसार यह कदम पाकिस्तान की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए वह पश्चिमी देशों में अपनी छवि सुधारना चाहता है और खुद को क्षेत्रीय स्थिरता तथा आतंकवाद-रोधी प्रयासों में महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है।
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